भोपाल। मध्य प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर एक चि

प्रदेश सरकार ने एक साल में 21 बार लिया उधार, अब हुआ 5.28 लाख करोड़ का बोझ

Development Challenges

भोपाल। मध्य प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। राज्य सरकार पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जो अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

​भारी-भरकम कर्ज का बोझ

मध्य प्रदेश सरकार पर अब कुल 5.28 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज हो गया है। ​वित्तीय वर्ष 2025-26 में यानि कि चालू वित्तीय वर्ष में सरकार ने रिकॉर्ड 21 बार बाजार से कर्ज लिया है। केवल मार्च 2026 के महीने में ही सरकार ने चार बार में कुल 18,500 करोड़ रुपये का ऋण लिया है।

योडनाओं के लिए चुनौती बना

 यह कर्ज राज्य की अर्थव्यवस्था और भविष्य की विकास योजनाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ​हालांकि सरकार इसे विकास कार्यों के लिए लिया गया ऋण बताती है, लेकिन विशेषज्ञों और विपक्षी दलों का मानना है कि 'लाड़ली बहना' जैसी बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए भारी फंड की आवश्यकता है। पुराने कर्जों पर ब्याज चुकाने के लिए भी नए कर्ज लेने की स्थिति बन रही है। प्रदेश में चल रहे बड़े निर्माण कार्यों की निरंतरता बनाए रखना।

​विपक्ष ने उठाए सवाल

​विपक्षी दलों ने इस डेटा को लेकर सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय की तुलना में कर्ज का यह अनुपात चिंताजनक है और आने वाली पीढ़ियों पर इसका बुरा असर पड़ेगा। यह खबर राज्य की राजकोषीय स्थिति (Fiscal Health) पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि कुल बजट का एक बड़ा हिस्सा अब केवल ब्याज चुकाने में ही खर्च हो रहा है।

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