एमपी हाईकोर्ट ने 5 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म मामले में बरकरार रखी दोषी की तिहरी फांसी की सजा
भोपाल/जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 5 वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म और निर्मम हत्या के मामले में दोषी को दी गई तिहरी फांसी की सजा को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने इस जघन्य अपराध को समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला बताते हुए कहा कि घटना की कल्पना मात्र से रूह कांप उठती है।
भोपाल के शाहजहांनाबाद का है मामला
यह मामला भोपाल के शाहजहांनाबाद क्षेत्र का है। वहां 5 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। मामले में आरोपी अतुल निहाले को निचली अदालत ने दुष्कर्म, हत्या और सबूत मिटाने जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराते हुए तिहरी फांसी की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट की मुख्य पीठ ने की मामले की गहन समीक्षा
दोषी के परिजनों ने विशेष अदालत के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर सुनवाई करते हुए जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ ने सभी तथ्यों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की गहन समीक्षा की।
बर्बरता ने चेतना को झकझोरा
हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि अपराध की प्रकृति अत्यंत क्रूर, अमानवीय और दुर्लभतम श्रेणी की है। मासूम बच्ची के साथ की गई बर्बरता समाज की चेतना को झकझोरती है। ऐसे अपराधों में दया या नरमी का कोई स्थान नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि निचली अदालत द्वारा दी गई सजा पूरी तरह न्यायसंगत और कानून सम्मत है तथा इसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
समाज के लिए कड़ा संदेश
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब इस मामले में अंतिम विकल्प के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है। तब तक हाईकोर्ट का यह निर्णय प्रभावी रहेगा। इस फैसले को महिला और बाल सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक कड़ा और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि मासूमों के खिलाफ अपराध करने वालों को कानून किसी भी सूरत में बख्शेगा नहीं।