मध्य प्रदेश में बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधो

मध्य प्रदेश में पॉक्सो मामलों में देरी, एक मामले के पूरा होने में लग रहा 380 दिन

MP POCSO Cases Delayed, Trials Taking 380 Days to Conclude

भोपाल (एमपी)। मध्य प्रदेश में बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों (पॉक्सो एक्ट, 2012) के मामलों में न्याय की गति चिंता का विषय बनी हुई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, राज्य में एक पॉक्सो मामले के ट्रायल को पूरा होने में औसतन 380 दिन का समय लग रहा है।

14,000 से अधिक मामले कोर्ट में लंबित

राज्य में यौन शोषण के 14,000 से अधिक मामले अदालतों में लंबित हैं, जिसके कारण 10,000 से अधिक पीड़ित बच्चे और उनके परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इन मामलों में सजा (Conviction Rate) की दर मात्र 20.11 प्रतिशत है। इसका अर्थ है कि अधिकांश मामलों में आरोपी बरी हो रहे हैं या प्रक्रिया में खामियों का लाभ उठा रहे हैं।

मध्य प्रदेश चौथे स्थान पर

लंबित मामलों की संख्या के आधार पर मध्य प्रदेश पूरे देश में चौथे स्थान पर है, जो राज्य की कानूनी व्यवस्था और फास्ट-ट्रैक अदालतों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। मध्य प्रदेश में ट्रायल में लगने वाला समय (380 दिन) दिल्ली या गुजरात जैसे राज्यों की तुलना में कम है, लेकिन 14,000 से अधिक मामलों का लंबित होना और सजा की कम दर अभी भी एक गंभीर सामाजिक और न्यायिक चुनौती है।

त्वरित निस्तारण के प्रयास जारी

इस देरी के पीछे गवाहों का मुकर जाना, अदालती कार्यवाही में तकनीकी बाधाएं और बुनियादी ढांचे की कमी जैसे कारणों को प्रमुख माना जा रहा है। सरकार और न्यायपालिका इन विशेष न्यायालयों के माध्यम से मामलों के त्वरित निस्तारण का प्रयास कर रही है।

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