आदेश नहीं माना तो जेल भेज दूंगा’... एमपीटी लॉज कर्मचारी ने प्रभारी पर लगाए सनसनीखेज आरोप
उमरिया {मध्यप्रदेश}: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला क्षेत्र स्थित व्हाइट टाइगर फॉरेस्ट लॉज (एमपीटी) में कार्यरत एक कर्मचारी ने अपने प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई है। कर्मचारी द्वारा दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, गाली-गलौज की जा रही है तथा नौकरी से निकलवाने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं।
प्रभारी पर अभद्र व्यवहार के आरोप
जानकारी के अनुसार ग्राम माला, पोस्ट ताला निवासी मुन्ना यादव व्हाइट टाइगर फॉरेस्ट लॉज में बेटर एवं हाउस कीपिंग का कार्य करता है। मुन्ना यादव का आरोप है कि लॉज प्रभारी अमित सिंह लंबे समय से उससे नाराज रहते हैं और बिना किसी कारण के उसके साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। कर्मचारी का कहना है कि प्रभारी द्वारा आए दिन अपशब्दों का प्रयोग करते हुए काम कराया जाता है। विरोध करने पर नौकरी से निकलवाने और प्रभाव का उपयोग कर कार्रवाई कराने की धमकी दी जाती है।
पुलिस बुलाकर दबाव बनाने का दावा
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि 15 जून 2026 की सुबह करीब 9 बजे पुलिस चौकी ताला में फोन कर पुलिस कर्मियों को बुलवाया गया और कर्मचारी पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। मुन्ना यादव का आरोप है कि उसे यह कहा गया कि यदि वह प्रभारी के निर्देशों के अनुसार कार्य नहीं करेगा तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया जाएगा।
मारपीट और गाली-गलौज के आरोप
कर्मचारी ने यह भी आरोप लगाया है कि लॉज में कार्यरत कुछ अन्य लोगों से उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट भी कराई गई। उसने कहा कि जब उसने अपनी गलती पूछी तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया और केवल प्रभारी के आदेश मानने की बात कही गई। कर्मचारी का कहना है कि वह केवल ईमानदारी से अपना काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण करना चाहता है, लेकिन उसे लगातार परेशान किया जा रहा है।
सुरक्षा की मांग, अवकाश पर कर्मचारी
लगातार मिल रही धमकियों और कथित प्रताड़ना से भयभीत होकर मुन्ना यादव ने फिलहाल अवकाश ले लिया है। आवेदन में उसने आशंका जताई है कि उसके साथ किसी भी समय अप्रिय घटना हो सकती है। उसने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। हालांकि इस मामले में प्रभारी अमित सिंह का पक्ष सामने नहीं आ सका है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला न केवल श्रमिक अधिकारों बल्कि कार्यस्थल पर कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान से भी जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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