जबलपुर में गिरवी जमीन बेचकर 1.43 करोड़ की धोखाधड़ी, छिंदवाड़ा बैंक में लाखों का गबन
जबलपुर। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर ने भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए दो अलग-अलग जिलों में एफआईआर (FIR) दर्ज की है। जबलपुर में एक गंभीर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहां बैंक के पास बंधक (Mortgage) रखी गई संपत्ति को बिना अनुमति के बेच दिया गया।
ये हैं मुख्य आरोपी
इसरार खान (प्रोप्राइटर, जी.के. मेडिकोज) हैं, जिन्होंने केनरा बैंक, खोवा मंडी शाखा, जबलपुर के साथ धोखा किया। आरोपी इसरार खान ने भरतीपुर स्थित अपने 1350 वर्गफुट के प्लॉट को बैंक में गिरवी रखकर कुल 1.43 करोड़ रुपये का ऋण (Loan) लिया था। बैंक को बिना बताए और बिना एनओसी (NOC) लिए, आरोपी ने इस गिरवी रखी जमीन का एक हिस्सा (करीब 560 वर्गफुट) अन्य व्यक्तियों (मोहम्मद रफीक और मोहम्मद आसिफ) को बेच दिया। बैंक ऑडिट के दौरान जब दस्तावेजों का सत्यापन हुआ, तब इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
छिंदवाड़ा में भी मामला, सरकारी बैंक के खातों से लाखों का गबन
दूसरी कार्रवाई छिंदवाड़ा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCB) में हुई है, जहाँ बैंक के ही कर्मचारियों ने मिलीभगत कर सरकारी धन का गबन किया। क्लर्क और कंप्यूटर ऑपरेटर अभिषेक जैन, सहायक प्रबंधक अभय जैन और लेखा प्रभारी नीरज जैन इसमें शामित रहें। जांच में पाया गया कि अभिषेक जैन ने बैंक के आंतरिक खातों से अपने व्यक्तिगत खातों में कुल 19 NEFT ट्रांजैक्शन के जरिए करीब 10.30 लाख रुपये ट्रांसफर किए।
ऐसे पता चला
आरोपी ने अपनी 'मेकर आईडी' और अन्य अधिकारियों की 'चेकर आईडी' का गलत इस्तेमाल कर इस राशि को उड़ाया। विभागीय जांच में इन अधिकारियों को आपराधिक साजिश और लापरवाही का दोषी पाया गया है। EOW ने इन दोनों ही मामलों में आईपीसी की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।