नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी रा

हिंदुत्व किसी के खिलाफ नहीं हो सकता, यह सभी को साथ लेकर चलता है: राधाकृष्णन

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि हिंदुत्व का मतलब हर किसी के व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करते हुए उन्हें साथ लेकर चलना है और यह किसी के खिलाफ नहीं हो सकता।

उपराष्ट्रपति ने ये टिप्पणियां यहां ‘‘विश्वसंचार हिंदुत्व का’’ नामक पुस्तक के विमोचन के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कीं।

उन्होंने कहा, ‘‘हिंदुत्व किसी के खिलाफ नहीं हो सकता। हम सभी को साथ लेकर चलना चाहते हैं, लेकिन हर किसी के अपने अधिकार होने चाहिए, जिनकी रक्षा की जानी चाहिए। मुझे इतना महत्वाकांक्षी नहीं होना चाहिए कि मैं किसी के अधिकारों का अतिक्रमण करूं। यह हिंदुत्व नहीं है। यह धर्म भी नहीं है।’’

राधाकृष्णन ने यह भी कहा कि अलग-अलग ऐतिहासिक और बौद्धिक संदर्भों में हिंदुत्व के अलग-अलग अर्थ रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘राजनीतिक विचारकों, विद्वानों और आलोचकों ने इसकी अलग-अलग व्याख्या की है। इसलिए, इस विषय को गंभीरता से समझने के लिए इसके ऐतिहासिक विकास, इसके दार्शनिक पहलुओं और इससे जुड़ी अलग-अलग व्याख्याओं की पड़ताल करना आवश्यक है।’’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि संगठन की स्थापना ‘‘हिंदुत्व की महान सोच पर आधारित हमारी महान संस्कृति को पुनर्जीवित करने’’ के लिए की गई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘इसी दृष्टिकोण से केशव बलिराम हेडगेवार जी ने हिंदुत्व और संघ के बीच संबंध को समझा था। (आरएसएस की) शताब्दी वर्षगांठ एक ऐसे संगठन से जुड़े इतिहास, विचारों और कार्यप्रणाली पर विचार करने का मौका प्रदान करती है, जो बहुत लंबे समय में विकसित हुआ है।’’

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘हम अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन हम एकजुट रहते हैं। सांस्कृतिक हिंदुत्व मूल मूल्यों, सांस्कृतिक जीवन आदर्शों, वास्तविक मानवीय संबंधों और सार्वभौमिक कल्याण जैसे तत्वों के समन्वय को दर्शाता है।’’

उन्होंने कहा कि आरएसएस की कार्यप्रणाली समय की कसौटी पर खरी उतरी है, जिससे वह सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी के साथ एक महत्वपूर्ण संगठन के रूप में स्थापित हो सका है।

गंगा का उदाहरण देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह नदी हिमालय में एक छोटी धारा के रूप में शुरू होती है और जैसे-जैसे आगे बढ़ते हुए बंगाल की खाड़ी तक पहुंचती है, यह बड़े-बड़े जहाजों को भी ले जाने में सक्षम हो जाती है।

उन्होंने कहा कि इसी तरह आरएसएस की यात्रा को भी उल्लेखनीय विस्तार की यात्रा के रूप में देखा जा सकता है।

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘संघ की शुरुआत कुछ लोगों के साथ एक छोटे संगठन के रूप में हुई थी। आज यह एक वैश्विक संगठन बन गया है और देशभर में फैला हुआ है। इसके स्वयंसेवक राष्ट्रीय और सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं।’’

उपराष्ट्रपति ने कहा कि योग, जिसकी शुरुआत एक प्राचीन भारतीय पद्धति के रूप में हुई थी, आज पूरी दुनिया में प्रचलित हो गया है। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि कैसे कोई भारतीय परंपरा अपनी भौगोलिक और सांस्कृतिक सीमाओं से आगे बढ़कर व्यापक वैश्विक संवाद का हिस्सा बन सकती है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारत की समृद्ध विरासत को पढ़ें, उस पर सवाल उठाएं, उसकी पड़ताल करें और उसे समझें, साथ ही उन संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जागरूक रहें, जो वर्तमान को आकार देते हैं।

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘कोई सभ्यता तब फलती-फूलती और आगे बढ़ती है, जब उसमें अपने मूलभूत मूल्यों, संस्कृति और जीवन दर्शन में जड़ें बनाए रखते हुए बदलावों के साथ जुड़ने का विश्वास होता है।’’

भाषा

देवेंद्र सुरेश

सुरेश