जम्मू-कश्मीर आतंकी वित्तपोषण मामले में नवल किशोर कपूर को सुप्रीम कोर्ट से जमानत
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के कथित आतंकी वित्तपोषण मामले में आरोपी नवल किशोर कपूर को जमानत दे दी। अदालत ने उनकी करीब आठ साल एक महीने की लंबी हिरासत और मुकदमे की धीमी प्रगति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया।
आठ साल से ज्यादा समय से जेल में थे कपूर
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कपूर की लंबी हिरासत पर गौर किया। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि मामले की सुनवाई अभी तक पूरी नहीं हो सकी है और अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज किए जाने की प्रक्रिया जारी है। पीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से आरोपपत्र में शामिल किए गए गवाहों की बड़ी संख्या पर भी ध्यान दिया। आरोपपत्र में 200 से अधिक गवाहों की सूची है, लेकिन अब तक केवल 51 गवाहों से पूछताछ हो सकी है। एनआईए की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत को बताया कि मुकदमे की गति बढ़ाने के लिए अभियोजन पक्ष गवाहों की संख्या कम कर रहा है।
सह-आरोपी शब्बीर अहमद शाह को भी मिल चुकी है जमानत
अदालत ने यह भी गौर किया कि इसी मामले में सह-आरोपी और अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को पहले ही जमानत मिल चुकी है। कपूर की जमानत याचिका पर विचार करते समय पीठ ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा। कपूर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत में उनका पक्ष रखा, जबकि एनआईए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए।
निचली अदालत तय करेगी रिहाई की शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने कपूर को जमानत देते हुए उनकी रिहाई के लिए आवश्यक शर्तें तय करने का अधिकार निचली अदालत को सौंप दिया है। अब निचली अदालत द्वारा तय की जाने वाली शर्तों के अधीन कपूर को रिहा किया जाएगा। यह मामला जम्मू-कश्मीर में कथित आतंकी वित्तपोषण नेटवर्क की एनआईए जांच से जुड़ा है। एजेंसी के अनुसार, अलगाववादी नेताओं, आतंकवादी संगठनों और अन्य आरोपियों से जुड़े नेटवर्क के जरिए कथित तौर पर आतंकवादी और अलगाववादी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराया जा रहा था। एनआईए ने आरोप लगाया था कि विभिन्न स्रोतों से धन का प्रवाह किया गया और इसका इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद तथा अलगाववाद से जुड़ी गतिविधियों को समर्थन देने के लिए किया गया।
मुकदमा अभी भी जारी
यह मामला वर्ष 2017 में भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। जांच के दौरान कई अलगाववादी नेताओं और कथित वित्तपोषण नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कपूर की जमानत पर विचार करते समय उनकी लंबी हिरासत और मुकदमे की धीमी गति को महत्वपूर्ण माना। आरोपपत्र में 200 से अधिक गवाह होने के बावजूद अब तक केवल 51 गवाहों की गवाही पूरी हो पाई है।
(एएनआई)
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