सुभाष चंद्रा की पुनर्भुगतान योजना पर एनसीएलएटी ने अपील लंबित रखी, 23 सितंबर को पांच सदस्यीय पीठ करेगी नए सिरे से सुनवाई
नई दिल्ली: राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने जी ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी देने के खिलाफ असहमति जताने वाले ऋणदाताओं की अपील को फिलहाल लंबित रखा है। मामले की नए सिरे से सुनवाई 23 सितंबर को पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष होगी।
ऋणदाताओं ने एनसीएलएटी को दी जानकारी
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने असहमति जताने वाले ऋणदाताओं, जिनमें एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, केनरा बैंक और यूनियन बैंक शामिल हैं, की ओर से पक्ष रखा। यह मामला सुभाष चंद्रा से जुड़ा है, जो इस मामले में व्यक्तिगत गारंटर हैं।
पुनर्भुगतान योजना पर फिर होगी सुनवाई
राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की नवगठित पांच सदस्यीय पीठ ने पहले पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी देने वाले आदेश पर रोक लगा दी थी। अब इसी मामले पर 23 सितंबर को नए सिरे से सुनवाई की जाएगी। 31 अगस्त को एनसीएलटी की मूल पीठ ने पाया था कि मामले में स्पष्ट बहुमत नहीं बन पाया है। इसके बाद एनसीएलटी के अध्यक्ष ने मामले की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय विशेष पीठ का गठन किया। इस विशेष पीठ की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल कर रहे हैं। पीठ ने कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 419(5) के तहत स्पष्ट बहुमत नहीं होने का हवाला देते हुए 25 अगस्त के आदेश पर रोक लगा दी थी।
संपत्ति हस्तांतरण पर भी रोक
विशेष पीठ ने कार्यवाही लंबित रहने के दौरान सुभाष चंद्रा को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी संपत्तियों के हस्तांतरण से भी रोक दिया है। मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए गए हैं। इस मामले में मूल एनसीएलटी पीठ के सदस्यों के बीच 3 सितंबर 2025 को मतभेद सामने आया था। न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज और तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी की राय अलग-अलग थी। बाद में तीसरे सदस्य निलेश शर्मा ने 25 अगस्त 2026 को कुछ शर्तों के साथ पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी थी।
₹22,006.57 करोड़ के दावों के मुकाबले ₹6.25 करोड़ का भुगतान
प्रस्तावित पुनर्भुगतान योजना के तहत सुभाष चंद्रा ने लेनदारों को 6.25 करोड़ रुपये देने की पेशकश की है। इसके अलावा दिवाला समाधान प्रक्रिया की लागत के लिए 25 लाख रुपये का भुगतान प्रस्तावित है। वहीं, लेनदारों द्वारा स्वीकार किए गए कुल दावों की राशि करीब 22,006.57 करोड़ रुपये है। कई ऋणदाताओं ने इस योजना का विरोध किया है।
एस्सेल समूह से जुड़े ऋणों की गारंटी का मामला
सुभाष चंद्रा के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही एस्सेल समूह से जुड़ी कंपनियों के ऋणों की गारंटी देने से संबंधित है। इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस, जिसे अब सम्मान कैपिटल के नाम से जाना जाता है, ने 2022 में विवेक इंफ्राकॉन को दिए गए ऋण के खराब होने के बाद कार्यवाही शुरू की थी। इसके बाद 2024 में दिवाला याचिका स्वीकार की गई थी। अब इस पूरे मामले पर 23 सितंबर को एनसीएलटी की पांच सदस्यीय विशेष पीठ में दोबारा सुनवाई होगी।
(एएनआई)
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