महाराष्ट्र में NEET अभ्यर्थी ने की आत्महत्या, पुनर्परीक्षा के नतीजे से थी निराश
अहिल्यानगर (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के कर्जत तालुका के जलालपुर गांव में 19 वर्षीय मेडिकल छात्रा ने कथित तौर पर NEET पुनर्परीक्षा में कम अंक आने से निराश होकर अपने घर में आत्महत्या कर ली। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
19 वर्षीय अंकिता ने उठाया आत्मघाती कदम
मृतक छात्रा की पहचान अंकिता सुरेश सांगले के रूप में हुई है। महाराष्ट्र पुलिस के अनुसार, हाल ही में हुई NEET पुनर्परीक्षा में उसे 166 अंक मिले थे। इसके बाद उसने कथित तौर पर यह कदम उठाया। कर्जत पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।
पिता बोले- बेटी ने की थी अच्छी तैयारी
अंकिता के पिता सुरेश सांगले ने बताया कि उनकी बेटी ने शनिवार दोपहर घर में छत के पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। उनके अनुसार, अंकिता ने NEET परीक्षा की अच्छी तैयारी की थी और शुरुआती परीक्षा में अच्छे अंक भी मिले थे। लेकिन परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद वह तनाव में रहने लगी थी।
आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार ने भी उठाई न्याय की मांग
इससे पहले 25 जुलाई को NEET-UG पेपर लीक मामले के बाद आत्महत्या करने वाली आकांक्षा चतुर्वेदी के माता-पिता ने अपनी बेटी के लिए न्याय और मुआवजे की मांग की थी। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से वे संतुष्ट नहीं हैं।
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
आकांक्षा की मां नीलम चतुर्वेदी ने पेपर लीक के दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी वापस नहीं आ सकती, लेकिन परिवार को न्याय और मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत शीर्ष सरकारी नेतृत्व से भी इस्तीफे की मांग की।
'बेटी डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना चाहती थी'
आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि उनकी बेटी का सपना डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना था। उन्होंने कहा कि परिवार आज भी उसी सदमे से गुजर रहा है।
पेपर लीक के बाद हुआ था पुनर्परीक्षा का आयोजन
मई में NEET-UG परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद सरकार ने 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित कराई थी। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने घोषणा की थी कि आत्महत्या करने वाले NEET अभ्यर्थियों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। इस पूरे विवाद के बीच कई अभ्यर्थियों की आत्महत्या की घटनाएं सामने आईं।
धर्मेंद्र प्रधान ने दिया था इस्तीफा
25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा था कि वह छात्रों के व्यापक हित में पद छोड़ रहे हैं, ताकि देश के युवा किसी भ्रम का शिकार न हों।
(एएनआई)
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