70 हजार का कर्ज हुआ तो अस्पताल ने बनाया बंधक, 4 दिन बाद मिला नवजात का शव
सीहोर। यहां के जिला अस्पताल से मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहाँ एक बेबस पिता को अपनी नवजात बेटी का शव गोद में लेकर अस्पताल से बाहर निकलना पड़ा। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने ₹70,000 के बकाया बिल या कर्ज के कारण शव को चार दिनों तक बंधक बनाकर रखा था। मृतक बच्ची के पिता, रवि रघुवंशी, का आरोप है कि अस्पताल ने कर्ज की मांग को लेकर उनकी बेटी के शव को परिजनों को नहीं सौंपा।
मर्चुरी में पड़ा रहा शव
मासूम का शव पिछले चार दिनों से अस्पताल की मर्चुरी (शवगृह) में रखा हुआ था। आर्थिक तंगी और अस्पताल की कथित सख्ती के कारण परिवार अपनी बेटी का अंतिम संस्कार समय पर नहीं कर सका।
पिता भारी मन से निकलता दिखा
पिता अपनी मृत बेटी को गोद में लेकर भारी मन से अस्पताल परिसर से बाहर निकलता दिखे। उनके साथ एक महिला भी है जो गहरे शोक में डूबी हुई है।
अस्पताल प्रशासन ने मानसिक रूप से प्रताड़ित किया
पिता रवि रघुवंशी ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और पैसों के अभाव में उनकी बच्ची के शव को अंतिम विदाई के लिए भी तरसाया गया। उनका कहना है कि 4 दिनों तक वे अस्पताल के चक्कर काटते रहे, लेकिन संवेदनहीनता की हदें पार कर दी गईं।
सरकारी व्यवस्था पर उठ रहे हैं सवाल
अस्पताल के बाहर की यह तस्वीर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं पर गहरे सवाल खड़े करती है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन अक्सर ऐसी घटनाओं में तकनीकी कारणों या कागजी कार्रवाई का हवाला देता है, लेकिन एक गरीब पिता का अपनी बच्ची के शव के लिए 4 दिन तक इंतजार करना व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। यह घटना समाज में स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता और गरीबों के प्रति अस्पताल प्रशासन के असंवेदनशील रवैये को दर्शाता है।
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