एनजीटी ने बीएचयू में 33 पेड़ों की कथित अवैध कटाई म

बीएचयू पर एनजीटी की सख्ती: 33 पेड़ों की अवैध कटाई मामले में 2.65 करोड़ रुपये वसूलने का आदेश

NGT Orders ₹2.65 Cr Fine on BHU

नई दिल्ली: राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में कथित रूप से अवैध रूप से काटे गए 33 पेड़ों के मामले में विश्वविद्यालय से 2.65 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा तीन महीने के भीतर वसूलने का निर्देश दिया है।

तीन महीने में पूरी करनी होगी वसूली प्रक्रिया

न्यायाधिकरण ने कहा कि उसके पहले दिए गए आदेश के बावजूद मुआवजे की वसूली की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। हालांकि, बीएचयू की ओर से 978 पौधों का क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण किया गया है, लेकिन एनजीटी ने यूपीपीसीबी को निर्धारित समयसीमा के भीतर वसूली की कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया है।

33 पेड़ों की कटाई का मामला

यह मामला विश्वविद्यालय परिसर में आम, गुलमोहर और सात चंदन के पेड़ों सहित कुल 33 पेड़ों की कथित अवैध कटाई से जुड़ा है। याचिकाकर्ता और अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने बताया कि यह मामला कई वर्ष पुराना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद एनजीटी ने एक संयुक्त समिति गठित की थी। तिवारी के अनुसार, समिति की रिपोर्ट में 33 पेड़ों की कटाई की पुष्टि हुई थी। उन्होंने बताया कि बीएचयू ने चंदन के पेड़ों की चोरी होने का दावा किया था, जबकि समिति ने सवाल उठाया कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद ऐसी चोरी कैसे संभव हुई।

पहले भी जारी हुआ था आदेश

सौरभ तिवारी ने बताया कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी ने 11 अगस्त, 2025 को यूपीपीसीबी को पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की गणना कर तीन महीने के भीतर बीएचयू से राशि वसूलने का आदेश दिया था। हालांकि, यह कार्रवाई समय पर पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि यूपीपीसीबी ने उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ और सर्वोच्च न्यायालय के कुछ आदेशों का हवाला देते हुए वसूली में असमर्थता जताई थी।

क्रियान्वयन याचिका के बाद आया नया आदेश

तिवारी ने बताया कि इसके बाद उन्होंने एनजीटी में आदेश के क्रियान्वयन के लिए याचिका दायर की। मार्च में इस पर सुनवाई हुई और 7 जुलाई को एनजीटी की प्रधान पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान यूपीपीसीबी ने बताया कि आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

2.65 करोड़ रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति

तिवारी के अनुसार, एनजीटी ने अब यूपीपीसीबी को तीन महीने के भीतर बीएचयू से 2,65,06,877.08 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की राशि वसूलने और उसका भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

(एएनआई)

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