कोयला वसूली मामले में NIA कोर्ट ने 12 आरोपियों को सुनाई सजा
रांची: झारखंड के रांची स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को राज्य के अमरापली-मगध कोयला खनन क्षेत्रों में प्रतिबंधित तृतीया प्रस्तुति समिति (टीपीसी) के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से कोयला ट्रांसपोर्टरों, ठेकेदारों और व्यापारियों से जबरन वसूली और कर वसूली के संबंध में 12 आरोपियों को सजा सुनाई।
टीपीसी के 12 दोषियों को सजा
एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने कहा कि टीपीसी में नक्सलियों से संबद्ध सशस्त्र कैडर थे। इसके सदस्य स्थानीय समितियों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके झारखंड के कोयला क्षेत्रों से कोयले के खनन और परिवहन की अनुमति देने के बदले में कर वसूलने की आपराधिक साजिश में शामिल थे। सजा पाए 12 आरोपियों में से पांच को अधिकतम 10 वर्ष के कठोर कारावास (आरआई), छह को अधिकतम 8 वर्ष के कठोर कारावास और एक को अधिकतम 5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई।
चतरा कोयला वसूली मामले में NIA की चार्जशीट
यह मामला झारखंड के चतरा जिले के तांडवा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले अमरापली और मगध कोयला खनन क्षेत्रों में जबरन वसूली और कर वसूली से संबंधित है। राष्ट्रीय न्याय एजेंसी (एनआईए) ने 22 दिसंबर, 2018 को कुल 16 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र और 10 जनवरी, 2020 को पांच आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था।
NIA कोर्ट ने 12 आरोपियों को ठहराया दोषी
13 आरोपियों के खिलाफ प्रारंभिक सुनवाई 119 अभियोजन गवाहों के बयान दर्ज करने के साथ पूरी हो चुकी है। 12 अगस्त, 2026 को रांची स्थित विशेष एनआईए अदालत ने 12 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया, जबकि एक आरोपी को बरी कर दिया गया।
(इनपुट: ANI)
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