बिहार की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत मुख्यम

10 अप्रैल को अकेले राज्यसभा की शपथ लेंगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

फाइल फोटो

पटना (बिहार)। बिहार की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल, शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। इस शपथ ग्रहण के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। उन्हें अन्य चार सांसदों से अलग समय पर शपथ दिलाई जाएगी। तय कार्यक्रम के मुताबिक, नीतीश कुमार दोपहर करीब सवा 12 बजे शपथ लेंगे, जबकि नितिन नबीन, उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और शिवेश कुमार को संसद सत्र शुरू होने के बाद 16 अप्रैल को शपथ दिलाई जाएगी।

सीमित सार्वजनिक मौजूदगी के पीछे सवाल

इस अलग व्यवस्था को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि जदयू और भाजपा, दोनों ही दल नीतीश कुमार की सार्वजनिक मौजूदगी को सीमित रखना चाहते हैं। हाल के कुछ मौकों पर उनके व्यवहार को लेकर असहज स्थिति बनी है। यह केवल शारीरिक स्थिति का मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। 20 नवंबर 2025 को पटना के गांधी मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ के दौरान भी उन्हें पढ़ने में कठिनाई का सामना करना पड़ा था।

इस्तीफे की तारीख टली, अब 14 अप्रैल पर नजर

शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार उसी दिन या अगले दिन पटना लौट सकते हैं। हालांकि, वापसी के तुरंत बाद उनके इस्तीफे की संभावना नहीं है। पहले चर्चा थी कि वे 12 या 13 अप्रैल को पद छोड़ देंगे, लेकिन अब इसे टाल दिया गया है। इसकी वजह खरमास को बताया जा रहा है, जो 13 अप्रैल तक रहेगा। ऐसे में अब 14 अप्रैल को उनके इस्तीफा देने की बात सामने आ रही है। उनके करीबी नेताओं का कहना है कि करीब दो दशक तक मुख्यमंत्री रहने के बाद एक दिन आगे-पीछे होने से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता, इसलिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखा जा रहा है।

नई सरकार के गठन की तैयारी तेज

इस्तीफे के बाद नई सरकार के गठन को लेकर भी हलचल तेज है। सूत्रों के अनुसार, 14 अप्रैल की शाम तक नई सरकार शपथ ले सकती है। यदि ऐसा नहीं होता है तो 15 अप्रैल की सुबह यह प्रक्रिया पूरी हो सकती है। मुख्यमंत्री पद को लेकर अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन भाजपा की ओर से उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम प्रमुख दावेदार के रूप में उभर रहा है।

सम्राट चौधरी सबसे मजबूत दावेदार

पिछले कुछ समय में सम्राट चौधरी को लेकर कई संकेत मिले हैं। उन्हें पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए पार्टी ने स्टार प्रचारक बनाया है। इसके अलावा, आरबीआई बोर्ड की बैठक जब पटना में हुई तो गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मुख्यमंत्री के साथ-साथ केवल सम्राट चौधरी से ही मुलाकात की, जबकि वे फिलहाल वित्त मंत्री भी नहीं हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि सीमांचल दौरे के दौरान गृह मंत्रालय के अधिकारियों को सम्राट चौधरी के साथ समन्वय बनाने के निर्देश दिए गए थे। उन्हें भाजपा और जदयू दोनों का समर्थन प्राप्त है और पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने उनका कद लगातार बढ़ाया है। साथ ही, वे एनडीए के सामाजिक समीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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