सिर मुंडाने को कोई तैयार नहीं था, इसलिए मुझे निभाना पडा चाणक्य का ऐतिहासिक किरदार
भोपाल। मशहूर फिल्मकार और अभिनेता डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने अपने चर्चित और कालजयी धारावाहिक 'चाणक्य' से जुड़े दिलचस्प अनुभव साझा किए हैं। मप्र की राजधानी में डॉ. द्विवेदी ने धारावाहिक से संबंधित चीजों को बयां किया। डॉ. द्विवेदी ने बताया कि वे 'चाणक्य' धारावाहिक का निर्माण कर रहे थे, तब उनके पास कलाकारों की कमी नहीं थी। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कोई भी अभिनेता चाणक्य के किरदार के लिए अपने बाल मुंडवाने और लंबी शिखा रखने को तैयार नहीं था।
नकली बिग, असली नहीं लगते
उन्होंने बताया, उस दौर में नकली विग असली नहीं लगती थी। उन्होंने कहा, मैं किरदार की प्रामाणिकता से कोई समझौता नहीं करना चाहता था। ऐसे में जब कोई तैयार नहीं हुआ, तो मैंने खुद ही चाणक्य की भूमिका निभाने का फैसला किया। ऐतिहासिक और पौराणिक विषयों पर लगातार काम करने को लेकर डॉ. द्विवेदी ने कहा कि उन्हें वह संसार अपनी ओर आकर्षित करता है, जो आज के लोगों की स्मृतियों का हिस्सा नहीं है। रामायण, महाभारत और मौर्यकाल जैसे गहन विषयों पर काम करने के लिए वे लगातार गहरा अध्ययन करते हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि मेडिकल बैकग्राउंड से होने के कारण उनमें लंबे समय तक पढ़ने और रिसर्च करने का धैर्य है।
आज की कहानियों में पहले जैसा ठहराव नहीं
टीवी धारावाहिकों के गिरते स्तर और लोकप्रियता पर उन्होंने कहा कि आज की कहानियों में पहले जैसा ठहराव नहीं रहा। पहले धारावाहिक सप्ताह में सिर्फ एक बार आते थे, जिससे दर्शकों में उत्सुकता बनी रहती थी। अब रोजाना प्रसारण और कमजोर स्क्रिप्ट के कारण दर्शक बोर हो रहे हैं और उनका ध्यान टीवी से हटकर मोबाइल व इंस्टाग्राम रील्स की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहा है।
सिनेमा की तकनीक बदल रही, पर मूल पुराना
सिनेमा के बदलते स्वरूप पर डॉ. द्विवेदी का मानना है कि भले ही तकनीक बदल गई हो, लेकिन सिनेमा का मूल तत्व आज भी वही है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में आज भी ऐतिहासिक किरदारों को लेकर बड़े अभिनेताओं में रुचि कम दिखती है। ज्यादातर कलाकार आज भी रोमांटिक, एक्शन या थ्रिलर फिल्मों को ही पहली प्राथमिकता देते हैं।
वर्चुअल शूटिंग ही इंडस्ट्री का भविष्य
आने वाले समय को लेकर उन्होंने एक बड़ी भविष्यवाणी की। उनके अनुसार, एआई (Artificial Intelligence) और वर्चुअल शूटिंग ही फिल्म इंडस्ट्री का असली भविष्य हैं। आने वाले कुछ वर्षों में कलाकारों को आउटडोर लोकेशंस पर जाकर शूटिंग करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्टूडियो के भीतर ही वर्चुअल तकनीक की मदद से बेहद भव्य और वास्तविक दिखने वाले दृश्य तैयार किए जा सकेंगे, जिससे फिल्मों के निर्माण की लागत भी काफी कम हो जाएगी। डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा, उनकी एक नई ऐतिहासिक और पौराणिक फिल्म पर काम चल रहा है, जिसकी पृष्ठभूमि 16वीं शताब्दी की कहानी पर आधारित है।
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