यूपीआई पर एमडीआर शुल्क के विरोध में मध्यप्रदेश में मनाया गया 'नो यूपीआई डे'
इंदौर: केंद्र सरकार द्वारा 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने के फैसले के खिलाफ मध्यप्रदेश में व्यापारिक संगठनों ने बुधवार को नो यूपीआई डे मनाया। राज्य के अलग-अलग स्थानों पर व्यापारियों ने अपनी दुकानों पर लगे यूपीआई क्यूआर कोड स्कैनर को काले कपड़े से ढंक कर विरोध जताया। उन्होंने ग्राहकों से नकद भुगतान करने की अपील की।
अहिल्या चैंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने किया दावा
कारोबारी संगठनों के महासंघ अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने दावा किया कि 'नो यूपीआई डे' के अभियान को पूरे प्रदेश में व्यापारियों का समर्थन मिला और इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रतलाम, नीमच, मंदसौर और जावरा सहित विभिन्न स्थानों के कारोबारी इसमें शामिल हुए। खंडेलवाल, केंद्र सरकार के राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (एनटीडब्ल्यूबी) के सदस्य के तौर पर इस निकाय में मध्यप्रदेश की नुमाइंदगी करते हैं।
इंदौर समेत कई व्यापारिक संगठनों ने की फैसले को वापस लेने की मांग
उन्होंने कहा, व्यापारी सरकार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनका सवाल यह है कि एमडीआर से मिलने वाला धन जब सरकारी कोष में नहीं जा रहा है, तो व्यापारियों पर इसका अतिरिक्त बोझ क्यों डाला जा रहा है? खंडेलवाल के मुताबिक प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर के करीब 125 व्यापारिक संगठन 'नो यूपीआई डे' अभियान में शामिल हुए। इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने व्यापारियों और ग्राहकों के व्यापक हितों का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार को 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने का फैसला जल्द वापस लेना चाहिए।
2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर लगेगा 0.4%
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 15 अक्टूबर से पहले यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो व्यापारी यूपीआई क्यूआर कोड मशीनों को जलस्रोतों में विसर्जित कर देंगे। सरकार ने करीब छह साल तक पूरी तरह शुल्क-मुक्त रहे यूपीआई भुगतान की व्यवस्था में बदलाव करते हुए 15 सितंबर को घोषणा की थी कि 15 अक्टूबर से इस मंच के जरिये कारोबारियों को 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। हालांकि, रोजमर्रा के व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) लेनदेन और छोटे भुगतान को शुल्क से बाहर रखा गया है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा था, यूपीआई के जरिये ऐसे भुगतान करने पर ग्राहकों को कोई शुल्क नहीं देना होगा।
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