राजस्थान के इस गांव में पानी की बूंद-बूंद को तरसे लोग, प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान
शिवपुरी: कोलारस जनपद की ग्राम पंचायत कोटानाका के ग्राम छीपोल में करीब 250 घरों की आबादी पिछले पांच दिनों से पेयजल संकट से जूझ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में बिजली नहीं होने के कारण स्कूल में लगा एकमात्र बोर बंद पड़ा है, जिसके चलते लोगों को मजबूरी में गांव के बीच से गुजर रहे गंदे नाले का पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
सिस्टम की प्राथमिकता में सबसे पीछे है छीपोल गांव
ग्रामीणों के अनुसार, छीपोल राजस्थान सीमा से लगा कोलारस विकासखंड का मध्यप्रदेश का अंतिम गांव है। गांव में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा लगता है कि अंतिम गांव होने के कारण मूलभूत सुविधाओं के मामले में भी यह गांव सिस्टम की प्राथमिकता में सबसे पीछे है।
बिजली ना होने से पानी से वंचित हैं लोग
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में पहले स्कूल परिसर में एक हैंडपंप था, जो खराब हो गया था। इसके बाद वहां नया बोर करवाकर उसमें मोटर डाल दी गई। अब मोटर बिजली से चलती है, लेकिन पिछले पांच दिनों से गांव में बिजली नहीं आने के कारण बोर से पानी नहीं मिल पा रहा है। पानी की समस्या के चलते ग्रामीणों को दूसरे स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है। गांव के बीच से गौरी के तालाब की ओर जाने वाला नाला गुजरता है और दोनों ओर बस्ती है। ग्रामीणों का आरोप है कि खरई, सुजवाया, पिपराया कॉलोनी और कोटानाका क्षेत्र का गंदा पानी इसी नाले में आता है।
ग्रामीणों ने हैंडपंप लगाने की उठाई मांग
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में नया स्वास्थ्य केंद्र भवन बनकर तैयार है और वहां पानी के लिए बोर भी करवाया गया है, लेकिन बोर में अब तक न तो हैंडपंप लगाया गया और न ही मोटर डाली गई है। ऐसे में लाखों रुपये खर्च कर करवाया गया बोर ग्रामीणों के लिए फिलहाल किसी काम का नहीं है। ग्रामीणों की मांग है कि स्कूल के बोर से मोटर हटाकर दोबारा हैंडपंप लगाया जाए, ताकि बिजली गुल होने की स्थिति में भी लोगों को पानी मिल सके। इसके साथ ही स्वास्थ्य केंद्र के बोर में भी तत्काल हैंडपंप या मोटर की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
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