वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण को लेकर बहस के बीच उमर

वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण पर उमर अब्दुल्ला ने साफ किया रुख

वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस-NC में मतभेद

श्रीनगर: वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण पर चल रही बहस के बीच जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हालांकि उनकी पार्टी ने कभी भी राष्ट्रगान को नहीं अपनाया है और न ही भविष्य में ऐसा करेगी, लेकिन सरकारी कार्यक्रमों में इसे प्रस्तुत करने की कानूनी अनिवार्यता का पालन किया जाएगा। इस मुद्दे पर बोलते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि यह प्रावधान देशभर के सरकारी कार्यक्रमों पर लागू होता है और इसका पालन न करने पर कार्रवाई की जाएगी।

वंदे मातरम के सभी श्लोक अनिवार्य

राष्ट्रगान के संबंध में एक कानून बनाया गया है। वंदे मातरम के सभी श्लोक अनिवार्य हो गए हैं। यह न केवल जम्मू और कश्मीर पर, बल्कि पूरे देश पर लागू होता है। यह देशभर के सरकारी कार्यक्रमों के लिए प्रोटोकॉल है। इसका पालन न करने पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के समापन समारोह में भी राष्ट्रगान और राष्ट्रगान प्रस्तुत किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के समापन समारोह में भी राष्ट्रगान और राष्ट्रगान प्रस्तुत किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा, एक पार्टी के रूप में हमनें कभी वंदे मातरम को नहीं अपनाया है और न ही भविष्य में ऐसा करेंगे, लेकिन हमें कानूनी दायित्वों का पालन करना होगा।

वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण पर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस में मतभेद

यह बयान कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के 8 सितंबर के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वंदे मातरम का पूर्ण संस्करण भारत के स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा परिकल्पित समन्वयवादी और बहुलवादी मूल्यों के साथ मेल नहीं खाता है। उन्होंने पार्टी के सहयोगियों से 1937 में कांग्रेस द्वारा अपनाए गए राष्ट्रगान के संस्करण का सम्मान करने का आग्रह किया था। यह उसी दिन हुआ जब जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला श्रीनगर में आयोजित पहले अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में वंदे मातरम के पूर्ण गायन के दौरान खड़े रहे। अब्दुल्ला दंपति गीत के सभी छह छंदों के दौरान खड़े रहे, जिससे इस मुद्दे पर भारत ब्लॉक के भीतर मतभेद उजागर हुए। 

(इनपुट: ANI)

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