‘जीवितों को नहीं बख्शा जा रहा’: ओवैसी ने कानपुर कब्रिस्तान गिराए जाने की निंदा की
लखनऊ: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को कानपुर में कब्रिस्तान की जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए चलाए गए विध्वंस अभियान की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई और सवाल उठाया कि ढांचे को किस आधार पर ध्वस्त किया गया।
केडीए ने चलाया विध्वंस अभियान
अधिकारियों ने बताया कि कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने बर्रा-6 क्षेत्र में सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण को हटाने के लिए विध्वंस अभियान चलाया। इसमें कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल की जा रही जमीन का एक हिस्सा भी शामिल था। शनिवार को हुई इस कार्रवाई का जिक्र करते हुए ओवैसी ने इसे “अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक” बताया और कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाया। ओवैसी ने कहा, “यह कल सुबह 5:00 बजे हुआ। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक है। कानून के अनुसार कुछ भी नहीं किया जा रहा है।”
‘किस आधार पर ध्वस्त किया गया?’
ओवैसी ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, “इसे किस आधार पर ध्वस्त किया गया? आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? आप न तो जीवितों को बख्श रहे हैं और न ही उन लोगों को जो अब इस दुनिया में नहीं हैं।” ओवैसी ने आरोप लगाया कि उचित प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कानपुर में मस्जिदों और कब्रिस्तान को गिराए जाने की पिछली घटनाओं का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा, “इस तरह का काम बेहद गलत और अस्वीकार्य तरीके से किया जा रहा है। उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया जा रहा है।”
‘मुसलमानों को केवल वोट बैंक न समझें’
एआईएमआईएम प्रमुख ने मुस्लिम समुदाय के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की और आरोप लगाया कि समुदाय को राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेला जा रहा है। ओवैसी ने कहा, “यह निंदनीय है और हमारी राय में स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार नफरत की राजनीति कर रही है।” उन्होंने मुसलमानों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया और कहा कि समुदाय को केवल वोट बैंक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। “भाजपा मुसलमानों को टिकट नहीं देती, और आजकल अन्य पार्टियां भी बहुत कम टिकट दे रही हैं। मुसलमानों की हालत ऐसी हो गई है कि वे महज़ मतदाता बनकर रह गए हैं: चुनाव के दिन जाओ, वोट डालो, और फिर घर जाकर चुपचाप बैठ जाओ,” उन्होंने कहा।
‘उन्हें अधिकारों के साथ नागरिक बनाओ’
ओवैसी ने कहा कि राजनीतिक दलों को इसके बजाय समुदाय के नागरिक अधिकारों को मान्यता देनी चाहिए। “हम कह रहे हैं, उन्हें अधिकारों के साथ नागरिक बनाओ,” उन्होंने कहा। मुजफ्फरनगर घटना का जिक्र करते हुए ओवैसी ने इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया की भी आलोचना की। “जब आप सत्ता में थे, तब भी क्या मुजफ्फरनगर की घटना नहीं हुई थी? सत्ता में रहते हुए आपने कुछ नहीं किया। अब जब आप सत्ता में नहीं हैं, तो आप अपना मुंह तक नहीं खोलते,” उन्होंने कहा। “हमारी राय में, आज की भारतीय राजनीति की यही कड़वी सच्चाई है: मुस्लिम समुदाय को हाशिए पर धकेला जा रहा है,” ओवैसी ने आगे कहा।
मायावती के राजनीतिक सफर की तारीफ
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य पर बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने विचार व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने बसपा प्रमुख मायावती के राजनीतिक सफर की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “हर राजनीतिक दल अपने विचार व्यक्त करने में सक्षम है और वे खुद अपनी बात रखेंगे।” ओवैसी ने मायावती के राजनीतिक करियर, विशेष रूप से परिवार या पैतृक संपत्ति के बिना उनके उत्थान का सम्मान किया। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा यह माना है कि मायावती भारतीय राजनीति में उन कुछ लोगों में से एक हैं जिन्होंने परिवार या पैतृक संपत्ति के समर्थन के बिना राजनीतिक करियर बनाया, इतिहास रचा और पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई।” बहुमत वाली सरकार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि बताते हुए उन्होंने कहा, “स्पष्ट बहुमत से मुख्यमंत्री बनना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसलिए, मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं।” ओवैसी ने कहा, “ऐसा दोबारा होगा या नहीं, यह एक अलग बात है, लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा के इस तथ्य को स्वीकार किया जाना चाहिए।”
‘मानव जीवन का मूल्य अप्रासंगिक हो गया’
सामाजिक विज्ञान से तैयार सामग्री को लेकर समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान पर टिप्पणी करते हुए ओवैसी ने कहा कि ध्यान मानव जीवन और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहना चाहिए। उन्होंने कई ऐसे मामलों का जिक्र किया जिन्हें वे कुकर्म मानते हैं और कहा कि उन्हें कृत्रिम विज्ञान पर चल रही राजनीतिक बहस के कारण दबाया नहीं जाना चाहिए। ओवैसी ने कहा, “अगर हम कुकर्म की बात करें तो मुजफ्फरनगर की घटना कुकर्म थी। अगर हम कुकर्म की बात करें तो मुजफ्फरनगर के बाद हुए कई दंगे कुकर्म थे।” उन्होंने विध्वंस और कथित फर्जी मुठभेड़ों का जिक्र करते हुए कहा, “अगर हम कुकर्म की बात करें तो मस्जिदों को तोड़ना कुकर्म है, कब्रिस्तानों को तोड़ना कुकर्म है और फर्जी मुठभेड़ें करना कुकर्म है।” कृत्रिम विज्ञान पर केंद्रित रवैये की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, “अब इन सभी कुकर्मों को भुलाकर हम कृत्रिम विज्ञान के पीछे भाग रहे हैं। मानव जीवन का मूल्य अप्रासंगिक हो गया है।”
(एएनआई)
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