एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयुक्तों

ओवैसी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर उठाए सवाल, SIR पर रोक लगाने की उठाई मांग

ओवैसी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर उठाए सवाल

लखनऊ: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्तों (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति से संबंधित नए कानून को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन आयुक्तों को कानूनी छूट देना संस्थागत विश्वसनीयता को कमजोर करता है। एएनआई से बात करते हुए हैदराबाद के सांसद ने पूर्व सांसद इम्तियाज जलील के साथ लोकसभा में विधेयक पेश होने पर चिंता व्यक्त की थी और दावा किया था कि जनता के बीच चुनाव निकाय के प्रति विश्वास में गिरावट के बारे में उनकी चेतावनी सच साबित हुई है। मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की आलोचना करते हुए ओवैसी ने कहा, "जब यह विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था, कानून बनने से पहले ही हमने कहा था कि यह कानून भारत की जनता की नजर में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को प्रभावित करेगा। 

ओवैसी ने चुनाव आयुक्तों को कानूनी छूट देने और चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल

उन्होंने कहा, आपने इसमें एक प्रावधान जोड़ दिया है जो मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त बनने वाले किसी भी व्यक्ति को सेवानिवृत्ति के बाद भी कानूनी छूट प्रदान करता है। यह कैसे संभव है? प्रधानमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है, पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव को जैन हवाला डायरी मामले में तलब किया गया था और एल.के. आडवाणी बाबरी मस्जिद मामले में पेश होते थे। आप चुनाव आयुक्तों को कानूनी छूट क्यों दे रहे हैं? तीन सदस्यीय चयन समिति की संरचना पर सवाल उठाते हुए, जिसमें प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल हैं। एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि यह सत्ताधारी दल के पक्ष में बहुत अधिक झुकी हुई है। आप चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कैसे कर रहे हैं? विपक्ष के नेता, प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत केंद्रीय मंत्री हैं। स्वाभाविक रूप से, वे अपने-अपने व्यक्ति को नियुक्त करेंगे। यह आशंका सच साबित हुई है।

ओवैसी ने SIR रोकने और CJI को चयन समिति में शामिल करने की मांग की

महत्वपूर्ण सुधारों की मांग करते हुए, ओवैसी ने चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को वापस लाने का आह्वान किया। आपको इस कानून को रद्द करना होगा। प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश को वापस लाएं। ओवैसी ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन पर भी गंभीर आपत्ति जताई और इसे तत्काल बंद करने की मांग की। यह एसआईआर किस आधार पर आयोजित किया जा रहा है? दस करोड़ नाम हटा दिए गए हैं, और फॉर्म 6 जमा करते समय आप मैपिंग मांग रहे हैं। यह कैसे काम करेगा? इसके लिए कोई प्रावधान ही नहीं है। इस एसआईआर को बंद किया जाना चाहिए और इस कानून को रद्द किया जाना चाहिए।

विरोध करना मौलिक अधिकार: औवेसी

विरोध प्रदर्शनों से पहले राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा उपायों और बैरिकेडिंग का जिक्र करते हुए, एआईएमआईएम प्रमुख ने नागरिकों के आंदोलन करने के अधिकार का बचाव करते हुए कहा, सर्वोच्च न्यायालय ने स्वयं कहा है कि विरोध करना एक मौलिक अधिकार है। लोग विरोध करेंगे और उन्हें विरोध करना चाहिए। अगर आप दिल्ली को बंद कर देंगे, तो क्या आप लोगों के दिमाग को बंद कर पाएंगे? आप नहीं कर सकते। पूरी स्थिति को पूरी तरह से गलत तरीके से संभाला गया है। हालांकि, जब उनसे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इंडिया ब्लॉक के विरोध मार्च पर उनके रुख के बारे में पूछा गया, तो ओवैसी ने प्रदर्शन से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने कहा, "मेरा इससे कोई संबंध नहीं है, मैं इसका हिस्सा नहीं हूं। मैं इस पर कैसे टिप्पणी कर सकता हूं? मेरे पास इस पर कहने के लिए कुछ नहीं है- यह उनका कार्यक्रम है, उन्हें इसे करने दें। 

(इनपुट: ANI)

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