मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने बुधवार को पल

पलानी मठ की 1.35 एकड़ जमीन की बिक्री पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, विवादित विक्रय विलेख को किया 'अमान्य' घोषित

Palani Math Land Sale Deed Declared Invalid

चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने बुधवार को पलानी स्थित अरुलमिगु धंदापानी स्वामीगल मठ (मठ) द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया। न्यायालय ने दिंडीगुल जिले के पलानी में स्थित 1.35 एकड़ भूमि के संबंध में कुछ व्यक्तियों के पक्ष में निष्पादित एक अत्यधिक विवादास्पद विक्रय विलेख को स्पष्ट रूप से "अमान्य" घोषित कर दिया।

एकल पीठ का आदेश पलटा

न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन और आर. शक्तिवेल की खंडपीठ ने पूर्व एकल बेंच के आदेश को पलट दिया। उस निचली बेंच के आदेश में उप-पंजीयक को निर्देश दिया गया था कि यदि दस्तावेज अन्यथा वैध पाया जाता है तो विक्रय विलेख को पंजीकृत किया जाए। मामले की समीक्षा करने पर, खंडपीठ ने प्रारंभिक कार्यवाही में एक गंभीर त्रुटि पाई। अपीलकर्ता मठ को एकल बेंच के समक्ष पक्षकार के रूप में शामिल नहीं किया गया था और उप-पंजीयक ने दस्तावेज को पंजीकृत करने से पहले मठ द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर विचार भी नहीं किया था।

मठ ने उठाए कानूनी सवाल

अपनी अपील में मठ ने मूल निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि एकल पीठ का आदेश कानून और मामले के तथ्यों के विपरीत था, इसलिए इसमें हस्तक्षेप आवश्यक था। संस्था ने कहा कि सभी आवश्यक पक्षों को सुनवाई का अवसर दिए बिना प्रारंभिक चरण में ही रिट याचिका स्वीकार नहीं की जानी चाहिए थी।

'सुनियोजित तरीके से किया गया पूरा मामला'

मठ के कानूनी तर्कों के अनुसार पूरी प्रक्रिया को इस तरह तैयार किया गया कि उसकी निगरानी और आपत्तियों से बचा जा सके। मठ ने कहा कि उसकी संपत्ति के पंजीकरण की मांग वाली रिट याचिका में उसे आवश्यक पक्षकार के रूप में शामिल ही नहीं किया गया, जिससे पूरी कार्यवाही अनुचित और अवैध हो गई।

संपत्ति की प्रकृति को लेकर भी विवाद

मठ ने आगे कहा कि विक्रय विलेख इस प्रकार निष्पादित किया गया, मानो संपत्ति किसी निजी ट्रस्ट की हो, जबकि वास्तव में यह मठ की संपत्ति थी। संस्था का आरोप है कि पूरी रिट याचिका उसकी जानकारी और उपस्थिति के बिना स्वीकार कर ली गई। मठ ने यह भी तर्क दिया कि एकल पीठ इस तथ्य पर ध्यान देने में विफल रही कि संपत्ति का वास्तविक कब्जा ठक्कर के पास था। संस्था का कहना था कि इन गंभीर विसंगतियों के बावजूद पंजीकरण को वैध रहने देना भविष्य में और अधिक कानूनी विवादों को जन्म देगा।

अधिकारियों पर गिरी कार्रवाई की गाज

उच्च न्यायालय के फैसले के बाद राज्य के पंजीकरण विभाग ने त्वरित अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। विवादित दस्तावेज़ को मूल रूप से पंजीकृत करने वाले उप-पंजीयक (प्रभारी) जस्टिन मणिकंदन सुब्रमणियन को निलंबित कर दिया गया है। गिरफ्तारी से बचने के प्रयास में उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की और कहा कि उन्होंने पंजीकरण उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में किया था।

जांच सीबी-सीआईडी को सौंपी गई

मामले का असर प्रशासनिक स्तर पर भी देखने को मिला। पंजीकरण विभाग ने जिला रजिस्ट्रार शशिकला को भी निलंबित कर दिया है। वहीं, संभावित मिलीभगत और धोखाधड़ी की जांच के लिए मामला अपराध शाखा-अपराध जांच विभाग (सीबी-सीआईडी) को सौंप दिया गया है। न्यायमूर्ति के. राजशेखर ने सीबी-सीआईडी को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई तक स्थगित कर दी। (एएनआई)

यह भी पढ़े: दान व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए बड़ा फैसला, मनसा देवी मंदिर के पुजारी अब पहनेंगे बिना जेब वाले वस्त्र