नाबालिग लड़के का यौन उत्पीड़न करने के दोषी को 20 साल की सजा
पालघर (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र में पालघर की एक अदालत ने नाबालिग लड़के का यौन उत्पीड़न करने के मामले में एक व्यक्ति को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने भीड़भाड़ वाले इलाके में ऐसी घटना होने की संभावना न होने के बचाव पक्ष के दावे को खारिज करते हुए कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों की उदासीनता पीड़ित की गवाही को कमजोर नहीं कर सकती। विशेष न्यायाधीश ए. एच. काशिकर ने महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई निवासी 41 वर्षीय मजदूर मधु धर्मा गोवारी को भारतीय दंड संहिता और लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण यानी पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया।
घटना और अभियोजन पक्ष का विवरण
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 12 दिसंबर 2020 को 14 वर्षीय पीड़ित अपने घर के पास कबूतरों को दाना खिला रहा था। इसी दौरान उसके पड़ोसी आरोपी ने उसे कबूतर के बच्चों को दिखाने के बहाने अपनी छत पर बुला लिया। इसके बाद आरोपी ने लड़के का मुंह दबा दिया, उसे घसीटकर एक कमरे में ले गया, उसके हाथ बांध दिए और उसका यौन उत्पीड़न किया। बाद में लड़का वहां से भाग निकला और आरोपी की धमकियों और पैसों के लालच को दरकिनार करके उसने अपनी मौसी को घटना के बारे में बताया, जिसके बाद उसी दिन प्राथमिकी दर्ज की गई।
अदालत की टिप्पणियां और फोरेंसिक साक्ष्य
अदालत ने बचाव पक्ष की इस दलील को खारिज कर दिया कि घनी आबादी वाले इलाके में ऐसा यौन उत्पीड़न होना संभव नहीं था। अदालत ने कहा कि आधुनिक सार्वजनिक स्थानों पर प्रत्यक्षदर्शियों की उदासीनता आम है और इससे पीड़ित की गवाही अविश्वसनीय नहीं हो जाती। अदालत ने यह भी कहा कि साक्ष्यों से यह साबित हुआ कि पीड़ित और आरोपी दोनों छत पर साथ थे, जिससे आरोपी की घटना के समय वहां मौजूद न होने की दलील खुद ही विरोधाभासी साबित हुई। पीड़ित के कपड़ों पर मिले वीर्य के धब्बे आरोपी से मेल खाते थे, जिसे अदालत ने यौन उत्पीड़न का निर्णायक प्रमाण माना।
आरोपी को सजा और मुआवजे के निर्देश
अदालत ने गोवारी को पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत 20 साल के कठोर कारावास और भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत 10 साल के कारावास की सजा सुनाई, जिसमें दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। अदालत ने आरोपी पर 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और इसे पुनर्वास के लिए पीड़ित को देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही अदालत ने ठाणे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को नियमों के अनुसार पीड़ित को अतिरिक्त मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।
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