पंकज चौधरी बोले- सत्ता परिवर्तन चाहते हैं तो संवैधानिक तरीके अपनाएं, विपक्ष के SIR विरोध पर उठाए सवाल
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। भाजपा उत्तर प्रदेश प्रमुख पंकज चौधरी ने विपक्षी INDIA गठबंधन पर चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार में बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनता के जनादेश के जरिए होना चाहिए। चौधरी ने विपक्ष के चुनावी गड़बड़ी के आरोपों की आलोचना करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन की मांग संवैधानिक तरीकों से ही पूरी की जानी चाहिए।
चुनाव हारने पर EVM और चुनाव आयोग पर सवाल उठाने का आरोप
पंकज चौधरी ने विपक्षी दलों पर चुनावी नतीजों को अपनी सुविधा के अनुसार स्वीकार करने का आरोप लगाया। उन्होंने 2024 के चुनावों के साथ केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश में हुए चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष जीतने पर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाता, लेकिन हारने पर EVM और चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराता है।
उन्होंने कहा, "2024 में हुए चुनाव भी इसी चुनाव आयोग के तहत कराए गए थे। केरल, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश में भी चुनाव हुए हैं। जब वे जीतते हैं, तो उन्हें प्रक्रिया से कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन जब वे हारते हैं, तो वे EVM और चुनाव आयोग को दोष देते हैं।"
SIR प्रक्रिया पर संसद में चर्चा का दिया हवाला
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चौधरी ने कहा कि यह प्रक्रिया पहली बार नहीं चलाई जा रही है। उन्होंने संसद में इस मुद्दे पर हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में इस विषय पर जवाब दिया था।
चौधरी के मुताबिक, अमित शाह ने लोकसभा में डेढ़ घंटे और राज्यसभा में एक घंटे तक विस्तृत जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सदस्य जवाब सुनने के बजाय सदन से बाहर चले गए। भाजपा प्रदेश प्रमुख ने SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियों पर सवाल उठाते हुए संसद में हुई चर्चा का हवाला दिया।
जंतर-मंतर के प्रदर्शन को लेकर विपक्ष पर निशाना
दिल्ली के जंतर-मंतर पर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए पंकज चौधरी ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान दिए गए बयानों से विपक्ष के सत्ता परिवर्तन के इरादे का पता चलता है। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने का रास्ता संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के प्रयासों से नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया से होकर गुजरना चाहिए।
चौधरी ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता परिवर्तन का अधिकार जनता के पास है। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों को चुनाव जीतकर और जनादेश प्राप्त करके सरकार बदलने का प्रयास करना चाहिए।
भारत में सरकार बदलने का संवैधानिक तरीका मौजूद है
यह पूछे जाने पर कि यदि विपक्ष को लगता है कि चुनावी प्रक्रिया पर भाजपा का नियंत्रण है, तो वह चुनाव कैसे जीत सकता है, चौधरी ने कानूनी और लोकतांत्रिक विकल्पों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से कानूनी रास्ता अपना सकते हैं या चुनाव जीतकर सरकार बदल सकते हैं।
उन्होंने कहा, "अगर वे सत्ता परिवर्तन चाहते हैं, तो यह संवैधानिक तरीकों से ही होना चाहिए। उन्हें चुनाव जीतना होगा और जनता का जनादेश हासिल करना होगा।" चौधरी ने दावा किया कि भारत में अब तक 18 लोकसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें से छह बार विपक्ष जीता है। उन्होंने इसे सरकार बदलने की संवैधानिक व्यवस्था का उदाहरण बताया।
यूपी में SIR के दौरान नाम कटने पर क्या बोले चौधरी?
उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर लगभग 85,000 से 90,000 फॉर्म 'ऑटोमैटिक रिवीजन' के दायरे में आने और पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटने के सवाल पर चौधरी ने फॉर्म 6 का विकल्प बताया। उन्होंने कहा कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हट गए हैं, वे नाम दोबारा जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 जमा कर सकते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार चुनावों के लिए चुनावी तंत्र का इस्तेमाल करती है। चौधरी ने कहा कि पात्र भारतीय नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने चाहिए और अपात्र लोगों के नाम निर्धारित प्रक्रिया के तहत हटाए जाने चाहिए। (Source: ANI)
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