नेपाल से आई पसाह नदी के पानी से पूर्वी चंपारण के क

तटबंध टूटने से 3 हजार हेक्टेयर भूमि जलमग्न, धान की खेती पर संकट

Pasah River Breach Floods 3,000 Hectares in East Champaran

पूर्वी चंपारण (बिहार)। नेपाल से त्रासदी लेकर आई पसाह नदी अब पूर्वी चंपारण जिले के आदापुर एवं छोड़ादन प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों गांव में अपनी कहर बरपा रही है। इंडो नेपाल सीमावर्ती आदापुर प्रखंड के बिलहिया गांव के करीब पसाह नदी की बंद सैकड़ो फिट टूट चुकी है जिससे दर्जनों गांव के खेत समेत गांव के किनारे बाढ़ जैसा मंजर बना दिया है। 

धान की खेती पर संकट

वही पानी की त्रासदी से दर्जनों गांव की धान का बिछड़े गल गया है साथ ही धान की खेती नहीं होने के कगार पर है। कुछ समय बाद यदि पसाह नदी की त्रासदी का पानी है भी जाता है तो किसानों के पास धन का बिचारा(बीज)नही बचा है ताकि धान की खेती की जा सके।

ग्रामीणों ने तटबंध मरम्मत नहीं होने का लगाया आरोप

बेलहिया गांव के ग्रामीणों का आरोप है पिछले वर्ष बाढ़ में आई त्रासदी से टूटी बांध का मरम्मत नहीं किया गया इसके बाद अब पसाह नदी की धार टूटी बंद से दर्जनों गांव में पानी फैल चुकी है और अब खेती नहीं हो पाएगी दर्जनों गांव के करीब हजारों एकड़ भूमि असिंचित रह जाएगी।

पूर्व कानून मंत्री ने सरकार पर साधा निशाना

बिहार सरकार के पूर्व कानून मंत्री डॉ समीम अहमद ने किसानों के प्रति चिंता जताते हुए बोले किसान को दोहरी मार झेलना पर रहा है,जिसको लेकर बिहार सरकार पर हमला बोलते हुए बताया सरकार की कोई ठोस कदम नही उठाने और जनता का पैसा बंदरबाट के कारण नेपाल से आई पसाह नदी प्रत्येक बर्ष बिक्राल रूप पानी लेकर आती है और किसानों को भारी क्षति पहुचाती है,पीछे साल पसाह नदी की बांध टूटा जिसका कोई मरमती कार्य नहीं किया गया ।

तीन हजार हेक्टेयर भूमि जलमग्न

जिसको लेकर अब पसाह नदी का विकराल त्रासदी भरा पानी टूटे बांध होकर तेज धार में कई फीट बहने लगी है जिससे दर्जनों गांव के किसानों को क्षति हो रही है धान विचरा(प्रज्वलित बीज)पानी मे डूब सर गई है वही करीब 3 हजार हेक्टेयर भूमि पर बाढ़ का रूप ले जलमग्न है।किसानों की खेत जोताई कर धान फसल लगाने के लिए पूरी तरह किसान तैयार कर लिया था अब जलमग्न की स्थिति में धान की खेती नही हो पाएगी।

यह भी पढे़ं:   जंतर-मंतर से हटाए गए सोनम वांगचुक, बिगड़ती सेहत के बीच सफदरजंग अस्पताल में कराया भर्ती