राहुल गांधी समेत 11 विपक्षी नेताओं की याचिका में 14 खामियां, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने मांगे जरूरी दस्तावेज
नई दिल्ली [भारत]: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और इंडिया ब्लॉक के नौ अन्य नेताओं की ओर से दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 14 खामियां चिह्नित की हैं। इस याचिका में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विभिन्न पहलुओं को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिकाकर्ताओं से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त एसएस संधू तथा विवेक जोशी को याचिका में प्रतिवादी क्यों बनाया है। यह आपत्ति संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका के संबंध में उठाई गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एसआईआर के दौरान चुनाव आयोग की शक्तियों के इस्तेमाल में कथित अनियमितताओं को लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने मतदाता सूची में संशोधन से जुड़े फैसलों को लेने और लागू करने की प्रक्रिया की जांच सहित अन्य राहतों की मांग की है।
याचिका में प्रतिवादियों के विवरण और जरूरी पैराग्राफ पर आपत्ति
रजिस्ट्री ने 12 अक्टूबर को अधिसूचित अपनी आपत्तियों में याचिकाकर्ताओं से लिस्टिंग प्रोफार्मा में प्रतिवादी का नाम ठीक करने, पृष्ठ संख्या 9 पर प्रतिवादियों के विवरण में सुधार करने और याचिका की प्रार्थना में प्रतिवादी की सही संख्या देने को कहा है। इसके अलावा, याचिका में आवश्यक समानता पैराग्राफ नहीं होने की बात भी उठाई गई है। रजिस्ट्री ने यह जानकारी मांगी है कि क्या याचिकाकर्ताओं ने पहले संबंधित आदेश या फैसले के खिलाफ किसी अदालत में अपील की थी। यदि ऐसा हुआ था, तो उस कार्यवाही का परिणाम क्या रहा, इसका विवरण भी देने को कहा गया है। रजिस्ट्री ने अपनी आपत्तियों में दो बार समानता पैराग्राफ नहीं होने का उल्लेख किया है।
फैसले की प्रति और अनुलग्नकों में मिलीं कमियां
रजिस्ट्री ने याचिकाकर्ताओं को 24 जून 2025 के उस फैसले की प्रति संलग्न करने का निर्देश दिया है, जिसका उल्लेख याचिका की प्रार्थना (क) में किया गया है। इसके अलावा, अनुलग्नक पी-2 की तारीख याचिका में दिए गए विवरण से मेल नहीं खाने की बात कही गई है। अनुलग्नक पी-5 में केस नंबर के मेल नहीं खाने पर भी आपत्ति जताई गई है। वहीं, अनुलग्नक पी-6 के लिए पेन ड्राइव जमा करने को कहा गया है। जरूरी दस्तावेजों की कमी के कारण अनुलग्नक पी-6 को भी अधूरा बताया गया है।
वकालतनामा, पहचान पत्र और कोर्ट फीस पर भी आपत्ति
रजिस्ट्री के अनुसार, याचिकाकर्ता संख्या 3 से 11 के वकालतनामे उपलब्ध नहीं हैं। इसके साथ ही याचिकाकर्ता संख्या 2 के पहचान पत्र की स्पष्ट प्रति जमा करने के लिए कहा गया है। याचिकाकर्ताओं को अदालत शुल्क के रूप में 220 रुपये अतिरिक्त जमा करने का निर्देश भी दिया गया है। रजिस्ट्री ने याचिका के पृष्ठ 57 और 64 की रंगीन प्रतियां मांगी हैं। दस्तावेजों की प्रस्तुति और पठनीयता को लेकर भी कई आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इनमें धुंधले या अपठनीय पृष्ठ, छोटे अक्षर, गायब पृष्ठ, स्थानीय भाषा में मौजूद एक पृष्ठ और पृष्ठ संख्या में विसंगतियां शामिल हैं। रजिस्ट्री ने कहा है कि अंतिम प्रिंटआउट लेने के बाद इन कमियों की पहचान की जाएगी।
एसआईआर प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को दी गई चुनौती
12 अक्टूबर को दायर याचिका में संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के सामूहिक कामकाज पर सवाल उठाए गए हैं। इसमें एसआईआर, फॉर्म 6 में संशोधन, ईसीआईनेट और ईआरओनेट के कामकाज तथा मतदाताओं के नाम हटाने या बहाल करने की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि चुनाव आयोग के संबंधित फैसलों से जुड़ी फाइलें, एजेंडा, कार्यवृत्त, टिप्पणियां और आपत्तियां पेश करने का निर्देश दिया जाए। इसके अलावा, उन्होंने आयोग के कामकाज की संवैधानिक प्रावधानों और 2023 के कानून की धारा 18 के अनुरूप जांच कराने, मतदाता सूची के डेटाबेस तथा हटाए गए नामों का स्वतंत्र ऑडिट कराने और यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना सूचना दिए और सुनवाई का उचित अवसर दिए बिना नहीं हटाया जाए।
मुख्य न्यायाधीश के संचार के बाद दायर हुई याचिका
यह याचिका भारत के मुख्य न्यायाधीश के 11 अक्टूबर के लिखित संचार के बाद दायर की गई थी। इसमें बताया गया था कि इसी तरह के मुद्दों से संबंधित मामलों की सुनवाई 13 अक्टूबर को होनी है। संचार के अनुसार, याचिकाकर्ता 12 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से या ई-फाइलिंग के माध्यम से अपनी याचिका दाखिल कर सकते थे।
(एएनआई)
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