चार राज्यों के चुनाव के बाद बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी उछाल आया है। इससे तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि इस नुकसान की भरपाई के लिए तेल कंपनियां चार राज्यों व एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी कर सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। कच्चे माल की लागत में भारी बढ़ोतरी के कारण तेल कंपनियों को पेट्रोल पर नुकसान बढ़कर 18 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 35 रुपए प्रति लीटर हो रहा है। इससे उनके मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है। मार्च में हुए भारी घाटे ने जनवरी और फरवरी के मुनाफे को लगभग खत्म कर दिया है, जिसके चलते जनवरी-मार्च तिमाही में इन कंपनियों के नुकसान में जाने की आशंका जताई जा रही है।
सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) बीते एक माह से प्रतिदिन करीब 2400 करोड़ रुपए का नुकसान उठा रही थीं। इस बीच केन्द्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर 10-10 रुपए प्रति लीटर उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद यह नुकसान घटकर लगभग 1600 करोड़ रुपए प्रतिदिन रह गया है।
वित्तीय सेवा कंपनी "मैक्वेरी" की रिपोर्ट के अनुसार, क्रूड में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से प्रति लीटर नुकसान करीब 6 रुपये तक बढ़ सकता है। कच्चे तेल की कीमत 135-165 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो यह घाटा और बढ़ने की आशंका है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अप्रैल 2022 के बाद खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।
मार्च में सरकार ने उत्पाद शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। इसके बावजूद कंपनियों का घाटा जारी है। अब ये पेट्रोल पर 11.9 रुपए प्रति लीटर तथा डीजल पर 7.8 रुपए प्रति लीटर नुकसान हो रहा है। ऐसे में वर्तमान कीमतों पर उत्पाद शुल्क को पूरी तरह खत्म करने से भी तेल विपणन कंपनियों के नुकसान की पूरी भरपाई नहीं होगी।
माना जा रहा है कि तेल कंपनियां चार राज्यों और एक केन्द्र शासित प्रदेश के चुनाव के बाद कीमतें बढ़ा सकती हैं। केरल, पुडुचेरी, असम में मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल तथा पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को वोटिंग समाप्त हो जाएगी। इसके बाद ईंधन की खुदरा कीमतों में वृद्धि तय मानी जा रही है।
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