पॉस्को एक्ट में अब उम्र निर्धारण के लिए 10वीं की मार्कशीट को माना जाएगा मुख्य आधार
भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने 'लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम' (POCSO Act) के मामलों में एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब पॉक्सो मामलों में पीड़ित की आयु निर्धारित करने के लिए 10वीं कक्षा की अंकसूची (मार्कशीट) को ही सबसे विश्वसनीय और अहम दस्तावेज माना जाएगा।
यह है नया निर्देश
पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी पुलिस अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत दर्ज मामलों में जांच के दौरान पीड़ित की उम्र का निर्धारण करने के लिए किसी भी तरह का भ्रम न रहे।
इस निर्देश की मुख्य विशेषताएं
यदि पीड़ित ने 10वीं की परीक्षा पास की है, तो उसकी मार्कशीट में दर्ज जन्मतिथि को ही उम्र का ठोस प्रमाण माना जाएगा। अक्सर पॉक्सो मामलों में आरोपी और अभियोजन पक्ष के बीच पीड़ित की उम्र को लेकर विवाद होता है। इस नियम से उम्र संबंधी अनिश्चितता खत्म होगी और जांच में पारदर्शिता आएगी।
बढ़ेगी प्रशासनिक स्पष्टता
पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वे जांच के दौरान सबसे पहले शैक्षणिक दस्तावेजों, विशेष रूप से मैट्रिकुलेशन (10वीं) सर्टिफिकेट को प्राथमिकता दें।
यह इसलिए जरूरी
कानूनी रूप से, किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम (JJ Act) की धारा 94 के तहत भी उम्र निर्धारण के लिए एक निश्चित पदानुक्रम (Hierarchy) निर्धारित है, जिसमें 10वीं की मार्कशीट या स्कूल का जन्म प्रमाण पत्र सबसे ऊपर होता है।
इस निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उम्र को लेकर कानूनी लड़ाई में समय बर्बाद न हो, जिससे मामलों का निपटारा जल्दी हो सके। मौखिक दावों या अस्पष्ट दस्तावेजों के बजाय एक आधिकारिक और सत्यापित दस्तावेज (मार्कशीट) को आधार बनाया जाए। यह सुनिश्चित करना कि पीड़ित वास्तव में नाबालिग है या नहीं, ताकि कानून का सही और न्यायसंगत उपयोग हो सके।
पुलिस मुख्यालय की सराहनीय पहल
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय का यह कदम पॉक्सो मामलों की कानूनी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित (streamline) करने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। इससे पुलिस जांच की गुणवत्ता में सुधार होगा और अदालतों में उम्र से संबंधित साक्ष्यों को प्रस्तुत करना अधिक स्पष्ट और सरल हो जाएगा।
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