उत्तर प्रदेश में कोडीनयुकत कफ सिरप की तस्करी के मा

जहरीले कफ सिरप की जांच में एसआईटी ने बिहार तक की फर्मों को खंगाला

जहरीले कफ सिरप की जांच में एसआईटी ने बिहार तक की फर्मों को खंगाला

दवा तस्करी में संलिप्त फर्म के चार्टर्ड अकाउंटेंट के दफ्तर में भी कई गयी पड़ताल

वाराणसी। उत्तर प्रदेश में कोडीनयुकत कफ सिरप की तस्करी के मामले में जांच कर रहा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने वाराणसी और गाजियाबाद के साथ ही बिहार, झारखंड तक मेडिकल फर्मों को खंगाल रही हैं। औषधि प्रशासन विभाग के साथ ही इस मामले में एसआईटी भी जांच में संलग्न है। दोनों विभागों की टीमों ने नारकोटिक्स से समन्वयक बनाकर जौनपुर और आसपास के जिलों में भी कई जगह छापेमारी की है। 

एसआईटी जांच में शामिल सिंडिकेट शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला प्रसाद के पुराने रिकॉर्ड को एसआईटी खंगाल रही है। जांच टीमों ने फर्मों के चार्टर्ड अकाउंटेंट के दफ़्तर पहुंचकर टीमों ने उनके दस्वेजों की जांच की है। वाराणसी के मैदागिन, सप्तसागर दवा मंडी, दारानगर, विशेश्वरगंज, चौक क्षेत्र के बैंकिंग लेनदेन, इंश्योरेंस समेत फर्म के कारोबार को लेकर पूछताछ की जा रही है।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, नारकोटिक्स से समन्वयक बनाकर एसआईटी जांच में जारी है। लखनऊ स्थित ड्रग मुख्यालय से इस पूरे प्रकरण की निगरानी कराई जा रही है। कुछ गोपनीय तरीके से भी लखनऊ की टीमें वाराणसी, जौनपुर में डेरा डाले हुई है। बिहार, झारखंड तक टीमें पहुंची हैं। शैली ट्रेडर्स के जरिए शुभम और उसके पिता भोला ने वाराणसी समेत पूर्वांचल के 250 स्टाकिस्टों के संपर्क में रहे और सभी से फर्जी बिलिंग कराई है।

शुभम जायसवाल के साथ हमेशा 10 से 15 युवाओं की टोली पांच से छह लग्जरी गाड़ियों के साथ चलती थी। सत्ता और विपक्ष से जुड़े नेताओं को भी शुभम लाभ पहुंचाता था। सूत्रों के अनुसार सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ लोगों ने शुभम के साथ कारोबार भी किया है। जांच टीम का मानना है कि इस रैकेट से संबंधित कुछ और लोग जल्द ही आ सकते हैं गिरफ्त में।

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