डीडवाना-कुचामन: जयपुर जिले के भेराणा धाम प्रकरण को

भेराणा धाम विवाद पर खत्म नहीं हो रही सियासत, डॉ. ज्योति मिर्धा ने हनुमान बेनीवाल और RLP पर साधा निशाना

भेराणा धाम विवाद पर खत्म नहीं हो रही सियासत, डॉ. ज्योति मिर्धा ने हनुमान बेनीवाल और RLP पर साधा निशाना

डीडवाना-कुचामन: जयपुर जिले के भेराणा धाम प्रकरण को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ज्योति मिर्धा ने नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। 

भाजपा के प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने कुचामन आई ज्योति मिर्धा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भेराणा धाम मामले में भाजपा पहले से ही संत समाज और स्थानीय लोगों की भावनाओं को गंभीरता से लेते हुए समाधान की दिशा में काम कर रही थी। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं ने साधु-संतों की मांगों को मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाया था तथा प्रशासनिक स्तर पर भी लगातार संवाद जारी था। इसी बीच आरएलपी ने पूरे आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया।

विधानसभा में एक विधायक नहीं, लेकिन बात मुख्यमंत्री जैसी

डॉ. मिर्धा ने सांसद हनुमान बेनीवाल की कार्यशैली और बयानबाजी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आरएलपी का विधानसभा में एक भी विधायक नहीं है, लेकिन उसके नेता खुद को मुख्यमंत्री की तरह प्रस्तुत करने का प्रयास करते रहते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चाहे कोई सामाजिक कार्यक्रम हो, धार्मिक आयोजन हो या पारिवारिक समारोह, हर मंच को राजनीतिक भाषण का माध्यम बना देना बेनीवाल की आदत बन चुकी है। मिर्धा ने आरोप लगाया कि हल्की और विवादित भाषा का उपयोग कर राजनीतिक कद बड़ा दिखाने की कोशिश लगातार की जाती रही है।

सभा के बयानों का हवाला देकर साधा निशाना

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ने भेराणा धाम में आयोजित सभा के दौरान दिए गए कुछ कथित बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे आंदोलन की गंभीरता और उसकी दिशा दोनों पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि सभा में एक समर्थक द्वारा तेजाजी के जयकारे लगाए जाने पर सांसद ने कथित तौर पर कहा, “अरे गांजा पीया हुआ है क्या?” वहीं सभा समाप्ति के दौरान भी उन्होंने मंच से ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जो धार्मिक माहौल के अनुरूप नहीं थे।

मिर्धा ने कहा कि जिस आंदोलन को आस्था और श्रद्धा से जुड़ा बताया जा रहा था, उसमें इस तरह की भाषा का इस्तेमाल अपने आप में बहुत कुछ स्पष्ट करता है। उन्होंने कहा कि अब जनता खुद तय कर सकती है कि मुद्दा वास्तव में धार्मिक था या उसे राजनीतिक रूप देने की कोशिश की गई।

बेनीवाल की राजनीति से अब किसी को हैरानी नहीं

डॉ. मिर्धा ने कहा कि हनुमान बेनीवाल की राजनीतिक शैली को देखते हुए इस तरह के बयान अब चौंकाने वाले नहीं रह गए हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में भाषा और मर्यादा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है और बेनीवाल की राजनीति उसी दिशा में आगे बढ़ती दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि जनता और राजनीतिक विश्लेषक अब इस तरह की बयानबाजी को समझ चुके हैं और आने वाले समय में लोग ऐसे मुद्दों पर और ज्यादा सजग रहेंगे।

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