शासकीय अस्पताल पोरसा की नई बिल्डिंग का उद्घाटन 15

शासकीय अस्पताल पोरसा की नई बिल्डिंग बनी शोपीस, एक माह बाद भी नहीं पहुंचे स्पेशलिस्ट डॉक्टर

Porsa Hospital Lacks Specialists Despite New Building Inauguration

मुरैना (मध्यप्रदेश)। शासकीय अस्पताल पोरसा की नई बिल्डिंग का उद्घाटन 15 मई 2026 को बड़े उत्साह के साथ किया गया था। उद्घाटन समारोह में मंच से पांच स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की पदस्थापना का आश्वासन दिया गया था, लेकिन लगभग एक माह बीतने के बाद भी एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक अस्पताल नहीं पहुंचा है। इससे क्षेत्र के मरीजों में निराशा और नाराजगी बढ़ती जा रही है।

मरीजों की बढ़ती परेशानी और सीमित स्टाफ

करीब 500 से 700 मरीजों की दैनिक ओपीडी वाले इस अस्पताल का संचालन वर्तमान में मात्र दो नियमित डॉक्टरों और दो अनुबंधित चिकित्सकों के सहयोग से किया जा रहा है। सबसे अधिक परेशानी महिला मरीजों को उठानी पड़ रही है, क्योंकि अस्पताल में महिला चिकित्सक उपलब्ध नहीं है। इसके चलते प्रतिदिन कई महिला मरीजों को मुरैना और ग्वालियर रेफर किया जा रहा है।

महिला मरीज सबसे ज्यादा परेशान

गौरतलब है कि वर्ष 2005 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री रूस्तम सिंह ने पोरसा अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, सर्जन सहित अन्य स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति की घोषणा की थी। लेकिन 21 वर्ष बीत जाने के बाद भी यह घोषणा धरातल पर नहीं उतर सकी। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अस्पताल की नई बिल्डिंग तो बन गई, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं अब भी पुरानी स्थिति में ही हैं। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए जिला मुख्यालय या अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।

पुरानी घोषणाएं अब भी अधूरी

कौशलेन्द्र सिंह धोर्रा का कहना है कि पोरसा प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित है, इसलिए भोपाल से मिलने वाली सुविधाएं यहां तक पहुंचते-पहुंचते सिर्फ कागजों में सिमट कर रह जाती हैं। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर ने आरोप लगाया कि प्रदेश में केवल घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं होता। पोरसा अस्पताल इसका जीता-जागता उदाहरण है।

स्थानीय लोगों में बढ़ता आक्रोश

व्यापार संघ अध्यक्ष महावीर जैन का कहना है कि इस मुद्दे को कई बार उठाया गया, लेकिन शासन-प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी मुकेश ने कहा कि ग्रामीण अंचल के लोगों के लिए यह अस्पताल जीवनरेखा है, लेकिन स्पेशलिस्ट डॉक्टर न होने से उन्हें मजबूरी में बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है।

प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल

वहीं ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. शैलेन्द्र सिंह तोमर ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की मांग को लेकर लगातार जिला मुख्यालय को पत्र भेजे जा रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी स्पेशलिस्ट डॉक्टर की पदस्थापना नहीं हुई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई बिल्डिंग के उद्घाटन के दौरान किए गए वादे कब पूरे होंगे और पोरसा क्षेत्र की लगभग ढाई लाख आबादी को विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ कब मिल पाएगा। 

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