केन्द्र की मोदी सरकार ने छह राज्यों के विद्युत वित

केन्द्र ने विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के लिए छह राज्यों को तीन विकल्प दिये

केन्द्र ने विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के लिए छह राज्यों को तीन विकल्प दिये

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने किया केन्द्र के प्रस्ताव के विरोध का एलान

लखनऊ। केन्द्र की मोदी सरकार ने छह राज्यों के विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के लिए तीन विकल्पों में से एक को चुनने का विकल्प दिया है। विकल्प नहीं चुनने की स्थिति में राज्यों को केंद्र से मिलने वाली सहायता बंद करने की धमकी दी गयी है। मंत्री समूह की पिछले दिनों दिल्ली में हुई बैठक में यह प्रस्ताव दिया गयाभजिसके मिनट्स (कार्य वृत्त) अब सामने आये हैं। यूपी के विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने यह जानकारी देते हुए इस धमकी का पुरजोर विरोध करने का एलान किया है। 

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा कि पिछले दिनों हुई मंत्री समूह की बैठक में उत्तर प्रदेश सहित छह राज्यों को चेतावनी दी गई है कि निजीकरण के तीन विकल्पों को चुन लें अन्यथा केंद्र से मिलने वाली सहायता बंद कर दी जाएगी। इस धमकी के जरिये निजीकरण के लिए दबाव बनाया जा रहा है लेकिन कर्मचारी इस दबाव का भी पुरजोर विरोध करेंगे।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि 10 अक्तूबर को हुई मंत्री समूह की बैठक में उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और तमिलनाडु के ऊर्जा मंत्री शामिल थे। इस बैठक के मिनट अब जारी हुए हैं। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि निजीकरण का कोई विकल्प स्वीकार नहीं किया जाएगा और निजीकरण के हर स्वरूप का पुरजोर विरोध किया जाएगा।

संघर्ष समिति द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार मंत्री समूह की बैठक में उत्तर प्रदेश सहित इन छह राज्यों के सामने पहला विकल्प यह होगा कि वे विद्युत वितरण निगमों की 51% इक्विटी निजी कंपनी को बेंच दे। ऐसी स्थिति में सरकार अरक्षणीय कर्ज (अनसस्टेनेबल डेट) का भार खुद उठा लेगी और निजी कंपनी के हिस्से में आए कर्ज के लिए 0% ब्याज पर 50 साल में वापस की जाने वाली वित्तीय सहायता देगी। दूसरे विकल्प के तौर पर इन राज्यों में विद्युत वितरण निगमों का प्रबंधन निजी क्षेत्र को दे दिया जाए। ऐसी स्थिति में सरकार अरक्षणीय कर्ज (अनसस्टेनेबल डेट) का भार खुद उठा लेगी और निजी क्षेत्र के प्रबंधन को पांच साल तक वित्तीय ग्रांट दी जाएगी। 

समिति ने बताया कि तीसरे विकल्प के तौर पर इन राज्यों की विद्युत वितरण कंपनियां की स्टॉक एक्सचेंज में सेबी में लिस्टिंग की जाए। इसके लिए विद्युत वितरण कंपनियां की ग्रेडिंग कम से कम "ए" होनी चाहिए। ऐसी विद्युत वितरण कंपनियों को जिनकी सेबी में सूचीबद्ध हो जाएगी उन्हें भी केंद्र सरकार वित्तीय ग्रांट देगी। इन तीनों शर्तों को संघर्ष समिति ने निजीकरण के लिए ब्लैकमेल की संज्ञा दी है। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि अन्य प्रांतों के बिजलीकर्मियों के साथ विचार विमर्श कर निजीकरण के विरोध में संघर्ष की साझा रणनीति मुम्बई में 03 नवंबर को तैयार की जाएगी।