प्रशांत किशोर ने 20 साल की कमाई पार्टी को दान की, सिर्फ दिल्ली का मकान अपने पास रखा
Bihar : जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) ने शुक्रवार को घोषणा की कि पिछले 20 साल में उन्होंने जो भी संपत्ति कमाई है, उसमें से दिल्ली वाला घर छोड़कर बाकी सब 'जन सुराज' को दान कर रहा हूं। साथ में जन सुराज अभियान को आगे बढ़ाने के लिए पीके ने जनता से आर्थिक मदद मांगी है।
उन्होंने कहा कि, हर व्यक्ति से मैं साल में एक हजार रुपए मांग रहा हूं, चाहे तो इससे ज्यादा भी दे सकते हैं। पीके ने ये भी कहा कि यदि कोई इस अभियान से नहीं जुड़ेगा और एक हजार रुपए नहीं देगा तो फिर मैं उससे नहीं मिलूंगा।
आगे उन्होंने कहा कि, अगले पांच साल में जो भी कमाऊंगा, उसका 90 प्रतिशत पैसा जन सुराज में लगाऊंगा। बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पीके ने मौन तोड़ते हुए राजग सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि सरकार ने 10-10 हजार रुपए देकर वोट खरीदे हैं। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मदद की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर छह महीने के अंदर महिलाओं के खाते में 2-2 लाख रुपए नहीं गए तो मैं एक-एक मंत्री और अफसर का घेराव करूंगा।
15 जनवरी से चलेगा अभियान
पीके ने कहा कि, गांधी जी की प्रेरणा से फिर अभियान शुरू करेंगे। 15 जनवरी से बिहार के सभी 1 लाख 18 हजार वार्ड, 550 प्रखंड में जाएंगे और 'बिहार नवनिर्माण संकल्प अभियान' के तहत लोगों से संवाद करेंगे और सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा कराएंगे। उन्होंने कहा कि अगले डेढ़ साल तक यह कार्यक्रम चलेगा। जिन जिन लोगों को 10 हजार रुपया मिला है, उनको 2 लाख रुपये दिलवाऊंगा।
नीतीश कैबिनेट पर तीखा हमला
नवगठित नीतीश मंत्रिमंडल पर हमला बोलते हुए पीके ने कहा कि आपराधिक छवि वाले नेताओं को मंत्री बनाया गया है। ऐसे लोगों को मंत्री बनाया गया, जो पढ़े-लिखे तक नहीं हैं, सिर्फ इसलिए मंत्री बन गए क्योंकि उनके पिता मंत्री थे। नीतीश मंत्रिमंडल, बिहार के घाव पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने कहा कि, नीतीश कुमार और मोदी ने बिहार की जनता को बता दिया कि हमने वोट खरीद लिया है, अब अपनी मर्जी चलाएंगे।
गांधी आश्रम में 24 घंटे का मौन व्रत
चुनाव परिणाम आने के बाद प्रशांत किशोर ने पश्चिम चंपारण के भितिहरवा स्थित गांधी आश्रम में 24 घंटे का मौन व्रत रखा। जन सुराज की ओर से बताया गया कि यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि हार की जिम्मेदारी स्वीकार करने के आत्ममंथन और जनता के संदेश को भीतर से समझने की उनकी कोशिश है। मौन व्रत के दौरान पीके पूरी रात धरना स्थल पर ही बैठे रहे और वहीं नींद लेते नजर आए।
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