बांकीपुर उपचुनाव 2026: प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत, भाजपा का 30 साल पुराना गढ़ ध्वस्त
बांकीपुर (बिहार)। बिहार की राजनीति के गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और रणनीतिक रूप से बड़ी खबर सामने आ रही है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और जाने-माने राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में शानदार जीत हासिल करते हुए भाजपा के सबसे सुरक्षित गढ़ में सेंध लगा दी है। इस जीत के साथ ही प्रशांत किशोर ने अपने चुनावी सफर का शानदार आगाज कर दिया है, जिसने सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी दलों दोनों की नींद उड़ा दी है।
उपचुनाव में कुल 34.24 प्रतिशत हुआ था मतदान
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस उपचुनाव में कुल 34.24 प्रतिशत मतदान हुआ था। कड़े मुकाबले के बाद प्रशांत किशोर ने 64,151 वोट हासिल किए और अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 वोटों के भारी अंतर से करारी शिकस्त दी। भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को इस चुनाव में 44,827 वोट मिले। इस जीत के साथ ही पटना की सड़कों और जन सुराज पार्टी के कार्यालय में जश्न का माहौल है। यहां समर्थक मिठाइयां बांट रहे हैं और ढोल-नगाड़ों के साथ अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं।
बांकीपुर उपचुनाव: एक नजर में क्रोनोलॉजी और सियासी सफर
- पहला चुनावी मैदान: साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी अपना खाता खोलने में असफल रही थी, जिसके ठीक 9 महीने बाद प्रशांत किशोर ने अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करते हुए यह ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।
- भाजपा के गढ़ का पतन: यह सीट 1995 से लगातार भाजपा के पास थी। यह निर्वाचन क्षेत्र पिछले तीन दशकों से एक ही परिवार का राजनीतिक गढ़ बना हुआ था, जिसे पहले नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा और बाद में उनके बेटे एवं वर्तमान भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने लगातार पांच बार जीता था।
- सांसद बनने से खाली हुई थी सीट: नितिन नबीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट पर यह उपचुनाव कराना पड़ा था, जहां 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने 50,000 से अधिक मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी।
- जन सुराज का उदय: कभी दूसरे दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने वाले प्रशांत किशोर ने जमीनी मुद्दों, शिक्षा और रोजगार के एजेंडे पर 'जन सुराज' आंदोलन की शुरुआत की थी। पहले ही सीधे चुनावी मुकाबले में एक प्रमुख शहरी सीट जीतना पार्टी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है।
प्रशांत किशोर की इस ऐतिहासिक जीत के बाद उनकी पत्नी ने भी बांकीपुर की जनता के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है। इस जीत पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए जन सुराज पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "लोकतंत्र में कोई भी किला सिर्फ जनता का होता है। शुक्रिया बांकीपुर- यह आपकी अपनी जीत है।"
बांकीपुर को माना जाता था भाजपा का सुरक्षित किला
दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह हार भाजपा के लिए सिर्फ एक सीट गंवाने से कहीं ज्यादा गहरी और गंभीर है। बांकीपुर को भाजपा का अचूक और सबसे सुरक्षित किला माना जाता था। ऐसे में नितिन नबीन के अपने घरेलू राजनीतिक मैदान पर इतनी बड़ी हार मिलना सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक रसूख और प्रतिष्ठा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। प्रशांत किशोर ने जिस सुनियोजित तरीके से इस राजनीतिक विरासत को ध्वस्त किया है, उसने आगामी बिहार की राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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