प्रियांक खड़गे का BJP पर हमला, पूछा- 'RSS ने तिरंगे की जगह भगवा ध्वज को क्यों चुना?'
बेंगलुरु: कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर निशाना साधा। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के इतिहास को लेकर सवाल उठाए और कहा कि भाजपा को अपना ‘हर घर तिरंगा’ अभियान RSS मुख्यालय से शुरू करना चाहिए।
RSS मुख्यालय से अभियान शुरू करने की सलाह
प्रियांक खड़गे ने आरोप लगाया कि आजादी के बाद पांच दशकों से अधिक समय तक RSS ने नागपुर स्थित अपने मुख्यालय पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया। उन्होंने कहा कि वहां आधिकारिक तौर पर तिरंगा 2002 में ही फहराया गया। खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए भाजपा से सवाल किया कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत RSS मुख्यालय से क्यों नहीं की जाती।
“RSS ने भगवा ध्वज को क्यों चुना?”
खड़गे ने भाजपा और RSS से यह भी सवाल किया कि संगठन ने तिरंगे के बजाय भगवा ध्वज को क्यों चुना। उन्होंने RSS के जुलूसों में तिरंगे की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि हर भारतीय को देशभक्ति का उपदेश देने से पहले भाजपा को यह बताना चाहिए कि उसके वैचारिक संगठन ने तिरंगे के बजाय भगवा ध्वज को क्यों चुना और इतने लंबे समय तक उसके मुख्यालय से राष्ट्रीय ध्वज क्यों गायब रहा।
“कितने RSS जुलूसों में तिरंगा देखा है?”
खड़गे ने सवाल किया कि लोगों ने कितने RSS जुलूस देखे हैं, जिनमें स्वयंसेवक पूरी वर्दी में भारतीय तिरंगा लेकर मार्च करते हों। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा एक भी उदाहरण नहीं है और कहा कि इसके बावजूद देशभक्ति को लेकर दूसरों को प्रमाण पत्र बांटे जाते हैं।
‘हर घर तिरंगा’ अभियान के बीच बयान
प्रियांक खड़गे की यह टिप्पणी ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के बीच आई है। यह अभियान स्वतंत्रता दिवस समारोहों का एक अहम हिस्सा बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य नागरिकों को अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और तिरंगे के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
देशभक्ति की भावना मजबूत करना है उद्देश्य
‘हर घर तिरंगा’ अभियान का उद्देश्य स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को श्रद्धांजलि देना और नागरिकों के बीच देशभक्ति की भावना को मजबूत करना भी है।
(एएनआई)
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