₹1 लाख करोड़ के यूसीएफ योजना के तहत 413 शहरी निकायों के लिए प्रस्ताव तैयार हो रहा
भोपाल। मध्य प्रदेश केंद्र सरकार के ₹1 लाख करोड़ के अर्बन चैलेंज फंड (UCF) में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए संभवतः देश का सबसे बड़ा प्रस्ताव प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहा है। इस प्रस्ताव में राज्य के सभी 413 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में जलापूर्ति और सीवरेज परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। यह कदम इंदौर के भागीरथपुरा जल प्रदूषण हादसे के बाद उठाया गया है, जिसके चलते राज्य और केंद्र—दोनों ने शहरी जल अवसंरचना को प्राथमिकता देनी शुरू की है।
बुनियादी ढांचा बन सके आर्थिक विकास का इंजन
केंद्र सरकार द्वारा फरवरी में शुरू किए गए इस UCF का उद्देश्य वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 के बीच लगभग ₹4 लाख करोड़ के कुल शहरी निवेश को प्रोत्साहित करना है, ताकि शहरों को बुनियादी ढांचे के उन्नयन और वित्तीय सुधारों के माध्यम से आर्थिक विकास का इंजन बनाया जा सके। अधिकारियों के अनुसार, इंदौर की घटना के बाद केंद्र ने संकेत दिया है कि जल-संबंधी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
जांच में मिली गंभीर कमियां
शहरी प्रशासन विभाग (UAD) की हालिया जांच में मौजूदा व्यवस्थाओं में गंभीर कमियां सामने आईं। जांच में 16 नगर निगमों में 62,000 से अधिक लीकेज पाए गए। अधिकारियों ने इसका कारण पुरानी पाइपलाइन व्यवस्था और खराब रखरखाव बताया, जिससे बड़े पैमाने पर उन्नयन की जरूरत स्पष्ट हुई।
फंडिंग मॉडल तैयार करना
इस योजना की एक प्रमुख विशेषता इसका बाजार-आधारित वित्तपोषण ढांचा है। इसके तहत शहरी स्थानीय निकायों को परियोजना लागत की व्यवस्था इस प्रकार करनी होगी कि 50% राशि बाजार स्रोतों से प्राप्त हो। इसमें म्युनिसिपल बॉन्ड, ऋण, पीपीपी मॉडल शामिल है। इसमें 25% योगदान केंद्र सरकार का होगा। इसके साथ 25% योगदान स्वयं शहरी स्थानीय निकायों का होगा।
मुख्य अवसंरचना के लिए ₹90,000 करोड़
कुल फंड में से ₹90,000 करोड़ (90%) मुख्य अवसंरचना परियोजनाओं के लिए निर्धारित हैं। ₹5,000 करोड़ (5%) परियोजना तैयारी और क्षमता निर्माण के लिए निर्धारित हैं। ₹5,000 करोड़ (5%) कमजोर शहरी निकायों को सहायता देने हेतु क्रेडिट गारंटी के लिए निर्धारित हैं।
शहरों और क्षेत्रों में व्यापक कवरेज
यह फंड सभी प्रकार के शहरों को कवर करेगा, जिनमें शामिल हैं महानगर, राज्य की राजधानियां, औद्योगिक नगर शामिल हैं।
छोटे शहरी केंद्र
निवेश 22 क्षेत्रों में किया जाएगा, जैसे जलापूर्ति, सीवरेज, शहरी परिवहन और सड़कें, ठोस ,अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्विकास, झुग्गी आवास शामिल हैं।
कड़े मानदंड भी रखे गये हैं
परियोजनाओं को 14 अनिवार्य शर्तों को पूरा करना होगा। इनमें बहु-क्षेत्रीय एकीकरण, पूरे शहर पर प्रभाव, वित्तीय स्थिरता शामिल है। UAD अधिकारियों ने बताया कि राज्यों को आवंटित राशि का कम से कम 25% छह महीने के भीतर उपयोग करना होगा। साथ ही, दो साल बाद प्रदर्शन के आधार पर पुनः आवंटन भी किया जाएगा।
चरणबद्ध फंडिंग
फंड इस प्रकार जारी किया जाएगा, 30% स्वीकृति के समय, 50% परियोजना के 40% पूरा होने के बाद, 20% परियोजना में 75% प्रगति होने पर जारी किया जाएगा।
“गेम चेंजर” कदम
UAD आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि राज्य सभी शहरी स्थानीय निकायों से प्रस्ताव जुटा रहा है, ताकि एक व्यापक और उच्च-प्रभाव वाला प्रस्ताव तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि हमने पूरे राज्य से सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। अंतिम समेकित प्रस्ताव गेम चेंजर साबित होगा और इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश के लिए सबसे अधिक आवंटन सुनिश्चित करना है।
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