देहरादून-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण परियोज

देहरादून-ऋषिकेश हाईवे चौड़ीकरण के लिए पेड़ों की कटाई का विरोध, पर्यावरण कार्यकर्ता सड़क पर उतरे

Protest Erupts Against Tree Felling for Dehradun-Rishikesh Highway Expansion

ऋषिकेश,(उत्तराखंड)। देहरादून–ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग पर भानियावाला और रानीपोखरी के बीच प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत साल के पेड़ों की कटाई का स्थानीय लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता लगातार विरोध कर रहे हैं। ऋषिकेश में पिछले कई दिनों से जारी इस प्रदर्शन में प्रदर्शनकारी प्रशासन से पर्यावरणीय प्रभावों को ध्यान में रखते हुए परियोजना की समीक्षा करने की मांग कर रहे हैं।

पेड़ों की कटाई से क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नुकसान

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बड़े पैमाने पर साल के पेड़ों की कटाई से क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचेगा। उनका मानना है कि इससे तापमान में वृद्धि, भूजल स्तर में गिरावट और जैव विविधता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। स्थानीय निवासी एवं अधिवक्ता आशुतोष कोठारी ने बताया कि पेड़ों को बचाने के उद्देश्य से विरोध प्रदर्शन पिछले पांच दिनों से जारी है।

उत्तराखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और इसके जंगलों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार, वर्षों पुराने ये विशाल पेड़ न केवल ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, बल्कि सड़कों को छाया भी देते हैं। उन्होंने कहा कि पेड़ों की कटाई से सड़कों पर सीधी धूप पड़ेगी, जिससे गर्मी और बढ़ेगी।

15 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

कोठारी ने यह भी बताया कि प्रदर्शनकारी 15 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और उनके द्वारा दायर अवमानना याचिका पर आने वाले फैसले का इंतजार कर रहे हैं। उनका आरोप है, कि पेड़ों को चरणबद्ध तरीके से काटा जा रहा है, जबकि वर्षा ऋतु के दौरान ऐसी कटाई से मिट्टी की नमी और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है।

प्रस्तावित चार-लेन सड़क परियोजना पर चिंता

पर्यावरण कार्यकर्ता शिल्पी ने भी प्रस्तावित चार-लेन सड़क परियोजना पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन वह जंगलों की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, यदि यातायात की समस्या का समाधान केवल सड़क चौड़ीकरण से किया जाएगा, तो भविष्य में पहाड़ों और जंगलों पर भी इसी तरह का दबाव बढ़ सकता है।

आसपास के क्षेत्रों में पहले की तुलना में बारिश कम

उन्होंने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में तापमान पहले ही बढ़ चुका है और वर्षा का पैटर्न भी बदल रहा है। उनका कहना था, कि ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में पहले की तुलना में कम बारिश हो रही है, जिसे स्थानीय लोग प्रत्यक्ष रूप से महसूस कर रहे हैं।

पुराने पेड़ केवल हरियाली का हिस्सा

शिल्पी ने कहा कि पुराने पेड़ केवल हरियाली का हिस्सा नहीं होते, बल्कि वे अनेक जीव-जंतुओं, सूक्ष्म जीवों और पूरे पारिस्थितिक तंत्र का आधार होते हैं। उनका मानना है कि बड़े पैमाने पर वनों की कटाई से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है और इसके दूरगामी दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती गर्मी का सबसे अधिक असर आम और मध्यम वर्ग के लोगों पर पड़ता है, जबकि आर्थिक रूप से सक्षम लोग वैकल्पिक स्थानों पर जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड में पिछले वर्षों में 46 हजार हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र समाप्त हो चुका है।

र्यावरणीय प्रभावों को लेकर स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण संगठनों का विरोध लगातार जारी

उल्लेखनीय है कि देहरादून–ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में यातायात व्यवस्था और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। हालांकि, प्रस्तावित वृक्ष कटाई के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण संगठनों का विरोध लगातार जारी है। (एएनआई)

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