लंबित बिल के भुगतान के बदले रिश्वत का आरोप, 30 हजार लेते PWD इंजीनियर गिरफ्तार
ब्रूगढ़: लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के एक सहायक कार्यकारी अभियंता पर 30,000 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में शिकायत मिलने के बाद मुख्यमंत्री सतर्कता प्रकोष्ठ ने डिब्रूगढ़ स्थित पीडब्ल्यूडी कार्यालय पर छापा मारा। इस कार्रवाई के दौरान सहायक कार्यकारी अभियंता मृदुल बाग्लारी को कथित तौर पर 30,000 रुपये की रिश्वत की पहली किस्त लेते हुए सीएम सतर्कता प्रकोष्ठ के अधिकारियों ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की और कार्यालय से विभिन्न दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की। साथ ही अधिकारियों की एक टीम ने सहायक कार्यकारी अभियंता मृदुल बाग्लारी के आवास की तलाशी ली और बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की।
लंबित बिलों के भुगतान के बदले मांगी गई रिश्वत
गौरतलब है कि रिश्वत एक लंबित परियोजना के बिलों के भुगतान से संबंधित थी। शिकायतकर्ता, राजशेखर हजारिका ने बताया कि वह पीडब्ल्यूडी के प्रथम श्रेणी के ठेकेदार हैं, जिन्होंने विभाग के लिए तीन-चार परियोजनाएं हाथ में ली थीं और सौंपे गए काम को पूरा किया था। इसके बावजूद विभाग उनके बिलों का भुगतान नहीं कर रहा था। जब उन्होंने भुगतान में देरी के बारे में पूछा, तो उन्हें बताया गया, "आपको अभी कुछ भुगतान करना होगा, क्योंकि आपको इस काम से काफी मुनाफा हो रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के काम या व्यवसाय का उद्देश्य मुनाफा कमाना होता है। उन्होंने बताया कि उन्हें मासिक भुगतान नहीं मिलता, बल्कि उनकी एक बड़ी रकम लंबे समय तक काम में फंसी रहती है।
पूजा से पहले 1.30 लाख की मांग
भुगतान अक्सर एक साल या उससे अधिक समय बाद ही मिलता है। शुरुआत में 4 लाख रुपये की मांग की गई, लेकिन इतनी बड़ी रकम एक साथ देना मुश्किल था। इसलिए, इंजीनियर ने जोर देकर कहा कि चूंकि पूजा का त्योहार नजदीक आ रहा है, इसलिए 1.5 लाख रुपये का भुगतान करना जरूरी है। इसके बाद हजारिका ने मुख्यमंत्री सतर्कता प्रकोष्ठ में शिकायत दर्ज कराई। बाद की बातचीत में इंजीनियर मृदुल बागलारी ने पूजा से पहले 1.30 लाख रुपये के भुगतान की मांग दोहराई। हजारिका पहली किस्त के रूप में 30,000 रुपये देने पहुंचे, उसी समय सतर्कता प्रकोष्ठ के अधिकारियों ने इंजीनियर को गिरफ्तार कर लिया। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करने के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया।
बिल भुगतान के बदले रिश्वत का आरोप
हजारिका ने बताया, "हम ठेकेदार हैं। हमने 3-4 परियोजनाएं पूरी की थीं और काम भी पूरा हो चुका था। हालांकि, काम खत्म होने के बाद भी विभाग हमारे बिलों का भुगतान नहीं कर रहा था। जब हमने पूछा कि हमारा भुगतान क्यों रोका जा रहा है, तो उसने कहा कि बिल प्रोसेस करने के लिए हमें उसे कुछ पैसे देने होंगे और दावा किया कि हम काम से भारी मुनाफा कमा रहे हैं। उसने 4 लाख रुपये की मांग की। आज हम सतर्कता दल के साथ यहां पहुंचे और उसे हमसे 30,000 रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
(इनपुट: ANI)
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