हाथों में तिरंगा लिए बैरिकेड्स पर चढ़े राहुल गांधी, चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन
नई दिल्ली: मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में उस समय ज़बरदस्त हंगामा मच गया, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने नीति आयोग कार्यालय के पास लगी भारी लोहे की बैरिकेड्स पर चढ़कर तिरंगा लहराते हुए भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) मुख्यालय की ओर कूच किया। समाजवादी पार्टी के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क और उनके साथी सांसद भी बैरिकेड्स पर चढ़े हुए नजर आए। वहीं, दिल्ली पुलिस कर्मियों ने निर्वाचन सदन की ओर जाने वाले उच्च सुरक्षा गलियारे पर बढ़ रहे इस मार्च को रोकने की कोशिश की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाते हुए इंडिया ब्लॉक के नेता और समर्थक राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर उतर आए और चुनाव आयोग की ओर अपना मार्च शुरू किया। बाद में इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने नीति आयोग कार्यालय के पास विरोध प्रदर्शन किया।
प्रियंका गांधी और सुप्रिया सुले भी मार्च में शामिल
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और एनसीपी-एसपी सांसद सुप्रिया सुले समेत इंडिया ब्लॉक के कई अन्य सांसदों ने विरोध मार्च में हिस्सा लिया। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए एक पोस्ट में लिखा, “ज्ञानेश, हो गया भाई। अब इस्तीफा देने का समय आ गया है।”
खरगे ने सरकार पर लगाया अधिकार छीनने का आरोप
इससे पहले, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने आरोप लगाया कि सरकार लोगों के अधिकारों को छीन रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त पर सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने इंडिया ब्लॉक के सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मार्च के दौरान यह बात कही। खर्गे ने कहा कि आजादी के बाद हासिल किए गए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को कमजोर किया जा रहा है और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सरकार के निर्देश पर काम कर रहा है। खर्गे ने कहा, “देखिए, हम इस अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं कि सरकार लोगों के सभी अधिकारों को छीन रही है। और आज, आजादी के बाद हमें जो सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार मिला था, यह सरकार उसे खत्म करने की कोशिश कर रही है।”
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भारतीय चुनाव आयोग और सत्ताधारी भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चुनाव आयोग पर बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से नाम हटाने का आरोप लगाया और कहा कि सत्ताधारी पार्टी विपक्ष द्वारा पारदर्शिता के लिए किए जा रहे प्रयासों से "डरी हुई" है। चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर इंडिया ब्लॉक के विरोध मार्च के दौरान भारी पुलिस बैरिकेडिंग के बीच पत्रकारों से बात करते हुए यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उत्तर प्रदेश की मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं के बारे में सीधे स्पष्टीकरण देने की चुनौती दी। यादव ने कहा, "हम चिलचिलाती धूप या पसीने से नहीं डरते। भाजपा के लोग डरे हुए हैं, इसीलिए हर जगह बैरिकेड लगाए गए हैं।"
मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप
मतदाता दमन के आरोप लगाते हुए सपा प्रमुख ने कहा, "यदि भाजपा इतनी निष्पक्ष है, तो ज्ञानेश कुमार यहां आकर बताएं कि नंदलाल निषाद के नाम पर किसके हस्ताक्षर जाली किए गए थे। दशरथ के नाम पर 100 फॉर्म किसने जाली बनाए? मुख्य चुनाव आयुक्त को यहां आकर जवाब देना चाहिए। हमने उन्हें रंगे हाथों पकड़ा है... समाजवादियों ने इसे रंगे हाथों पकड़ा है।" यादव ने आगे कहा, "नियमों में स्पष्ट रूप से लिखा है कि आप पांच से अधिक वोट नहीं हटा सकते या पांच से अधिक फॉर्म-7 आवेदन जमा नहीं कर सकते। फिर भी, 100 से अधिक फॉर्म धोखाधड़ी से भरे गए।" उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने पिछले विधानसभा और संसदीय चुनावों में चुनावी कदाचार को बार-बार नजरअंदाज किया है।
चिदंबरम ने फॉर्म-6 को लेकर उठाया सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने मतदाता सूची विवाद को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने खुले न्यायालय में स्पष्ट रूप से कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय ने फॉर्म-6 में किसी भी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है। पत्रकारों से बात करते हुए चिदंबरम ने चुनाव आयोग के बचाव में सत्तारूढ़ पार्टी के बयान को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी सार्वजनिक रूप से दर्ज है। चिदंबरम ने कहा, "भाजपा स्पष्ट रूप से हिंदी या अंग्रेजी नहीं पढ़ सकती। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट रूप से कहा है, 'हमने फॉर्म-6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है।' उन्होंने यह बात एक बार कही और इसे कई बार प्रसारित किया जा रहा है। उन्होंने यह बात खुले न्यायालय में कही। कई वकीलों ने उनका बयान सुना है।"
भाजपा के दावे पर चिदंबरम का सवाल
सत्तारूढ़ पार्टी के दावों पर सवाल उठाते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पूछा, "भाजपा खुलेआम यह कैसे नकार सकती है कि सीजेआई ने ऐसा नहीं कहा? उन्होंने यह बात स्पष्ट रूप से कही है।" संशोधित दस्तावेजों की कानूनी प्रकृति को स्पष्ट करते हुए चिदंबरम ने कहा, "मैंने घोषणा देखी है, और यह वास्तव में फॉर्म-6 में संशोधन है। यह फॉर्म-6 में एक परिवर्धन है, और परिवर्धन का अर्थ संशोधन भी होता है।"
'लोकतंत्र बचाओ' अभियान का हिस्सा मार्च
यह मार्च मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विपक्ष के निरंतर अभियान और चुनाव आयोग से अधिक पारदर्शिता की मांग के बीच हो रहा है। इंडिया ब्लॉक की कई पार्टियों के नेताओं ने मार्च में भाग लिया और चुनाव आयोग के समक्ष अपनी चिंताएं रखीं। यह विरोध प्रदर्शन विपक्ष द्वारा घोषित व्यापक "लोकतंत्र बचाओ" अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत उसके नेता चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। निर्वाचन सदन तक मार्च से मतदाता सूचियों से संबंधित मुद्दों पर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक टकराव के और तेज होने की आशंका है।
(एएनआई)
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