कर्नाटक में पेट्रोल में तय सीमा से अधिक इथेनॉल मिल

कर्नाटक में पेट्रोल में इथेनॉल मिलावट पर राहुल गांधी का बड़ा हमला, ओएमसी ने दावों को किया खारिज

Lok Sabha LoP Rahul Gandhi (File photo)

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कर्नाटक में बेचे जा रहे पेट्रोल में तय सीमा से अधिक इथेनॉल होने का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार और तेल कंपनियों पर तीखे हमले किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्र प्रयोगशाला परीक्षणों में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत तक पाई गई है।

राहुल गांधी के आरोप और लैब परीक्षण के आंकड़े

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि ई20 अब स्कैम जैसा बन चुका है और जनता की गाड़ियों से सीधे तौर पर पेट्रोल की चोरी हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार दावा करती है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है, लेकिन कर्नाटक सरकार द्वारा सात जिलों से एकत्र किए गए पेट्रोल नमूनों की जब एक मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच कराई गई तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए।

परीक्षण के नतीजों के अनुसार, चौदह में से ग्यारह नमूनों में निर्धारित सीमा से अधिक इथेनॉल पाया गया। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी आईओसीएल के नमूनों में यह मात्रा 31.2 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी एचपीसीएल के नमूनों में 30.5 प्रतिशत दर्ज की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह अधिक मात्रा केवल सरकारी ही नहीं, बल्कि भारत पेट्रोलियम, नायरा और शेल जैसी निजी तेल कंपनियों के ईंधनों में भी पाई गई है। इसके अलावा कंपनियों की आंतरिक प्रयोगशालाओं ने इसकी कोई रिपोर्ट नहीं दी थी।

मिलावट और वाहनों के रख-रखाव पर वित्तीय बोझ

उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले वित्तीय और तकनीकी प्रभावों पर चिंता जताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि लोग महंगे दाम पर पेट्रोल खरीद रहे हैं, लेकिन उनके टैंक में इथेनॉल भरा जा रहा है। वाहन इस स्तर के इथेनॉल को सहन करने के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं, जिससे माइलेज में भारी कमी आती है और बार-बार मैकेनिक के पास जाना पड़ता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ईंधन स्टेशनों पर इस बात की कोई जानकारी नहीं दी जाती है कि टैंक में वास्तव में क्या डाला जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं के पास कोई विकल्प नहीं बचता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने स्पष्टीकरण मांगा कि देश के ईंधन टैंकों में असल में क्या डाला जा रहा है और तय सीमा से अधिक ईंधन में मिलावट करने वाली कंपनियों के खिलाफ कब कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को बहस की अपनी चुनौती को भी दोहराया।

तेल कंपनियों द्वारा नियमों का दिया गया हवाला

राहुल गांधी के इन आरोपों के एक दिन बाद इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम यानी तीनों सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी किया। कंपनियों ने कहा कि उन्होंने कर्नाटक सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले और विधिक माप विज्ञान विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति का संज्ञान लिया है, जिसमें राज्य के कुछ खुदरा दुकानों पर 26 से 31 प्रतिशत तक इथेनॉल होने का दावा किया गया था।

तेल कंपनियों ने इन रिपोर्ट किए गए निष्कर्षों को खारिज करते हुए कहा कि ये दावे निर्धारित वैधानिक और तकनीकी प्रक्रियाओं के अनुसार की गई टेस्टिंग पर आधारित नहीं हैं। कंपनियों के अनुसार देश भर में आपूर्ति किया जाने वाला ई20 पेट्रोल ब्यूरो ऑफ इंडियन Standards के विनिर्देश आईएस 17021 के अनुरूप है। कंपनियों ने अक्टूबर 2026 के इस परीक्षण में अपनाई गई सैंपलिंग पद्धति पर भी गंभीर सवाल उठाए।

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत जारी मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल विनियमन आदेश 2005 और विपणन अनुशासन दिशा-निर्देश 2024 का हवाला देते हुए कंपनियों ने बताया कि सैंपलिंग, सुरक्षित रखने, परीक्षण और परिणामों की सूचना देने के लिए एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया है। इसके तहत एक-लीटर के छह नमूने लिए जाने चाहिए, जिन्हें विधिवत सील कर डीलर, कंपनी और प्रयोगशाला को भेजा जाता है।

कर्नाटक सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की मांग

तेल कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से संपूर्ण सैंपलिंग दस्तावेज, आउटलेट-वार प्रयोगशाला रिपोर्ट और अपनाई गई परीक्षण पद्धति की प्रतियां साझा करने का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार और कंपनियों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में अधिकृत प्रयोगशाला में रेफरी विधि के माध्यम से स्वतंत्र परीक्षण के लिए काउंटर नमूनों तक पहुंच की मांग की है।

दूसरी ओर, इस पूरे विवाद के बीच कर्नाटक के मंत्री जी परमेश्वर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल किया कि जब राज्य में स्वतंत्र परीक्षणों में इथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत तक पाई गई है, तो उपभोक्ताओं की सुरक्षा कौन कर रहा है। उन्होंने वाहन सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों पर गहरी चिंता जताते हुए इस मामले की तुरंत जांच की मांग की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से स्पष्टीकरण मांगा। (इनपुट: ANI)

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