लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल

राहुल गांधी ने वाल्मीकि जयंती पर दी शुभकामनाएं, बोले- महर्षि वाल्मीकि ने सत्य, न्याय और करुणा का मार्ग दिखाया

Rahul Gandhi Extends Greetings on Valmiki Jayanti

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने वाल्मीकि जयंती के मौके पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने रामायण महाकाव्य के रचयिता और 'आदिकवि' महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी सत्य, न्याय, दया और सद्भाव की शिक्षाएं हमेशा समाज के लिए मार्गदर्शक बनी रहेंगी।

राहुल गांधी ने महर्षि वाल्मीकि को किया नमन

सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट में कांग्रेस नेता ने महर्षि वाल्मीकि के सद्भाव और सही आचरण से जुड़े आदर्शों का उल्लेख किया। राहुल गांधी ने लिखा, "महाकाव्य रामायण के रचयिता और आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती पर दिल से बधाई।"

‘उनका जीवन दर्शन हमेशा प्रेरणा देता रहेगा’

महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं के महत्व पर जोर देते हुए राहुल गांधी ने कहा, "महर्षि वाल्मीकि जी ने समाज को सच्चाई, न्याय, दया और मेलजोल का रास्ता दिखाया। उनका जीवन दर्शन हमेशा हमारे लिए प्रेरणा बना रहेगा।" इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती पर देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऋषि के मानवता के लिए अनमोल संदेश हमेशा देशवासियों को सही रास्ता दिखाने वाले प्रकाश की तरह काम करेंगे। X पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेंगी और मानवता के लिए उनके संदेश हमेशा प्रासंगिक बने रहेंगे। उन्होंने लिखा, "महर्षि वाल्मीकि जयंती के शुभ अवसर पर सभी को दिल से बधाई। उनके नेक विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के बुनियादी तत्व रहे हैं, जो हर युग में देश को पोषित और समृद्ध करते रहेंगे।"

महर्षि वाल्मीकि जयंती का महत्व

वाल्मीकि जयंती एक हिंदू त्योहार है, जिसे महर्षि वाल्मीकि के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्हें हिंदू महाकाव्य रामायण का रचयिता माना जाता है। महर्षि वाल्मीकि को भगवान राम की कथा पर आधारित रामायण के प्राचीनतम संस्करण के रचयिता के रूप में जाना जाता है। साहित्य और आध्यात्मिकता में उनके योगदान के कारण उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त है। संस्कृत साहित्य में उन्हें प्रथम कवि यानी 'आदिकवि' के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, वाल्मीकि जयंती अश्विन महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह तिथि आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर के सितंबर-अक्टूबर महीने में पड़ती है।

(एएनआई)

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