बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाकों में 30 से अधिक आदिव

बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले में राहुल गांधी ने स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने आदिवासी परिवारों से की मुलाकात

बालाघाट: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को बालाघाट के जगले गांव का दौरा किया और जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत के संबंध में आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि परिवार अपने बच्चों को खोने के दुख से जूझ रहे हैं और आरोप लगाया कि ये मौतें भाजपा सरकार की "उदासीनता और लापरवाही" से जुड़ी हैं।

बालाघाट में प्रभावित परिवारों से मिले राहुल गांधी

फेसबुक पर एक पोस्ट में कांग्रेस नेता ने लिखा, "अपने बच्चों को खोने से बड़ा कोई दुख नहीं होता। आज बालाघाट के ये आदिवासी परिवार उसी दर्द को सह रहे हैं। एक ऐसी त्रासदी जिसे टाला जा सकता था, फिर भी भाजपा सरकार की उदासीनता और लापरवाही ने इन मासूम बच्चों की जान ले ली। मैंने अपनी संवेदना व्यक्त की। साथ ही न्याय और बदलाव के बारे में लंबी चर्चा की। आइए, मैं आपको और विस्तार से बताता हूं"। कांग्रेस पार्टी ने यह भी कहा कि गांधी ने अपनी यात्रा के दौरान प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं को मजबूती से उठाया जाएगा। 

राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों की सुनीं समस्याएं

कांग्रेस पार्टी ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, विपक्ष के नेता राहुल गांधी आज बालाघाट के जगले गांव में आदिवासी परिवारों के बीच पहुंचे। पिछले कुछ दिनों में यहां आदिवासी परिवारों के 30 से अधिक बच्चों की कुपोषण और मलेरिया-खसरा जैसी बीमारियों से मौत हो गई है। राहुल गांधी ने यहां प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, उन्हें हिम्मत दी और उनकी समस्याओं को मजबूती से उठाने का वादा किया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बालाघाट में आदिवासी समुदाय स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और रोजगार के अवसरों की कमी का सामना कर रहे हैं। 

राहुल गांधी ने सरकार पर लापरवाही का लगाया आरोप

मध्य प्रदेश सरकार पर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता ने कहा कि कई बच्चों की बीमारी और कुपोषण से मौत हो गई है और आरोप लगाया कि इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और रोजगार में सरकारी सहायता "पूरी तरह से नदारद" है। यह दौरा बालाघाट के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की कथित मौतों को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच हुआ है। मौतों की सही संख्या और चिकित्सा संबंधी परिस्थितियों का आधिकारिक आकलन अभी भी जारी है। केंद्र के नेतृत्व में हुई एक जांच में कथित तौर पर किसी एक बीमारी या रोगजनक की पहचान नहीं हुई है, बल्कि खसरा, मलेरिया, सह-संक्रमण, श्वसन संकट, निर्जलीकरण, कुपोषण, एनीमिया और सदमे सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान की गई है। 

(इनपुट: ANI)

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