राजस्थान में 64 वर्षीय दादी को पालकी में बैठाकर काव्यऋषि कुंड पहुंचे 3 पोते
डीडवाना: आज के दौर में जहां बुजुर्गों के साथ गलत व्यवहार और उन्हें वृद्धाश्रम छोड़ने की खबरें सामने आती हैं, वहीं राजस्थान की कुचामन सिटी में एक परिवार ने बुजुर्गों के प्रति प्रेम, सम्मान और संस्कारों की अनूठी मिसाल पेश की है। गोदावरी गार्डन के पास रहने वाले एक परिवार के तीन पोतों ने अपनी 64 वर्षीय दादी की इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें पालकी में बैठाकर काव्यऋषि कुंड तक पहुंचाया और भगवान के दर्शन करवाए।
परिवार के बजरंगलाल कुमावत के अनुसार, उनकी दादी जीवनी देवी की इच्छा थी कि सावन के पवित्र महीने में उन्हें भगवान के दर्शन करवाए जाएं। दादी की इच्छा को पूरा करने के लिए उनके पोतों बजरंग, भूपेंद्र और दिनेश ने उन्हें पालकी में बैठाया और शनिवार को घर से काव्यऋषि कुंड के लिए रवाना हुए।
दादी के वजन के बराबर भरा जल
तीनों पोते अपनी दादी को पालकी में बैठाकर कठिन पहाड़ी रास्ते से होते हुए काव्यऋषि कुंड तक लेकर पहुंचे। यात्रा के दौरान उन्होंने दादी को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा। कुंड पर पहुंचने के बाद उन्होंने दादी के वजन के बराबर जल भरा और उसे कांवड़ के रूप में अपने कंधों पर रखकर वापस घर की ओर रवाना हुए। करीब 24 घंटे की यात्रा पूरी करने के बाद तीनों पोते रविवार को अपनी दादी के साथ घर लौटे।
लोगों ने तीनों पोतों की सराहना की
जब आसपास के लोगों को तीनों पोतों की इस पहल की जानकारी मिली तो उन्होंने उनकी खूब सराहना की। लोगों ने कहा कि आज जब बदलते दौर में रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं। ऐसे समय में इन युवाओं ने बुजुर्गों के प्रति सम्मान और परिवार के संस्कारों का जीवंत उदाहरण पेश किया है। बजरंगलाल कुमावत ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल दादी की इच्छा पूरी करना नहीं था, बल्कि आज की युवा पीढ़ी को बुजुर्गों के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान का संदेश देना भी था।
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