राजनाथ सिंह का कांग्रेस पर हमला, बोले- इंदिरा ने लोकतंत्र कैद किया, राहुल जेब में रखते हैं संविधान
लखनऊ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए पार्टी के इतिहास के चार कथित अक्षम्य अपराध गिनाए। उन्होंने 1975 के आपातकाल, 1984 में सिखों के नरसंहार और 1990 में राम भक्त कार सेवकों पर हुई गोलीबारी के संदर्भ में कांग्रेस को घेरा। साथ ही, उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों को पार्टी का चौथा अक्षम्य अपराध बताया। लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में तीन बड़े ऐतिहासिक अपराध हुए। उन्होंने पहला अपराध 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल को बताया। दूसरा अपराध 1984 में सिख समुदाय के लोगों के नरसंहार को बताया, जबकि तीसरे अपराध के रूप में उन्होंने 1990 में राम भक्त कार सेवकों पर गोलीबारी करने वाली सरकार को समर्थन देने का आरोप लगाया। सिंह ने कहा कि कांग्रेस अब संवैधानिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों पर हमला करके चौथा अक्षम्य अपराध कर रही है।
इंदिरा गांधी और राहुल गांधी पर निशाना
राजनाथ सिंह ने कहा, "1975 में इंदिरा गांधी ने लोकतंत्र को सलाखों के पीछे डाल दिया था। और आज राहुल जी संविधान को अपनी जेब में रखकर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इतिहास के पन्ने पलटने पर कई काले अध्याय सामने आते हैं। रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक स्वार्थ के लिए स्वायत्त संस्थाओं और संवैधानिक ढांचे पर लगातार सवाल उठा रही है।
राहुल गांधी को जनादेश का सम्मान करने की सलाह
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सिंह ने उन पर मनगढ़ंत आक्रोश फैलाने और राजनीतिक अशांति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल गांधी को जनता के जनादेश का सम्मान करने और अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्ममंथन करने की सलाह दी। सिंह ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को राजनीतिक स्वार्थ की वेदी पर बलिदान नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, संस्थाओं को बदनाम करने और राजनीतिक अवसरवादिता के जरिए देश के विकास की राह में बाधा नहीं डाली जानी चाहिए।
विरोध प्रदर्शनों को लेकर कांग्रेस पर आरोप
रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी चुनाव आयोग के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल राजनीतिक अशांति फैलाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में लगाने के बजाय उन्हें राजनीतिक टकराव का हिस्सा बनाया जा रहा है। सिंह ने यह भी दावा किया कि कुछ लोग बांग्लादेश में हुई घटनाओं से प्रेरित होकर भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर युवाओं को अव्यवस्था की राजनीति में मोहरे के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों का उद्देश्य केवल चुनावी सुधार नहीं है, बल्कि उनके अनुसार इसके पीछे सत्ता हासिल करने की राजनीतिक मंशा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंडिया ब्लॉक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे को सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक हितों के लिए निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर अशांति फैलाना उचित नहीं है।
एसआईआर के विरोध को लेकर जारी है राजनीतिक टकराव
राजनाथ सिंह का यह बयान दिल्ली में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है। विपक्षी नेताओं, इंडिया ब्लॉक की पार्टियों और छात्र संगठनों ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, भाजपा की ओर से विपक्ष के आरोपों और विरोध प्रदर्शनों की मंशा पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
{एएनआई}
ये भी पढ़ें: औरंगाबाद में हादसा, अज्ञात वाहन की टक्कर से 65 वर्षीय वृद्ध की मौत; रातभर सड़क पर पड़ा रहा शव