राम मंदिर दान मामले की जांच तेज, जेवरात और जमीन खरीद के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
अयोध्या : राम मंदिर में दान राशि से जुड़े कथित गड़बड़ी मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। एसआईटी चौथे दिन भी दस्तावेजों की पड़ताल और संबंधित लोगों से पूछताछ में जुटी रही। अब जांच का दायरा नकदी के साथ-साथ श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए कीमती जेवरातों तक भी पहुंच गया है।
जेवरातों के रिकॉर्ड पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, जांच टीम को चढ़ावे में मिले सोने, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड में कुछ विसंगतियां मिली हैं। इसी वजह से इनकी एंट्री और रखरखाव से जुड़े दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है।
ट्रस्ट पदाधिकारियों से पूछताछ जारी
जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारियों से सवाल-जवाब किए गए। एसआईटी यह जानने की कोशिश कर रही है कि दान राशि और अन्य चढ़ावे का हिसाब-किताब किस तरह रखा जाता था और उसमें कोई अनियमितता तो नहीं हुई।
जमीन खरीद के दस्तावेज भी खंगाले जा रहे
जांच टीम ने वर्ष 2021 से अब तक ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीनों के रिकॉर्ड की भी जांच शुरू कर दी है। भूमि खरीद से जुड़े दस्तावेज, भुगतान प्रक्रिया, मूल्यांकन रिपोर्ट और राजस्व अभिलेखों का मिलान किया जा रहा है।
खरीद मूल्य और बाजार मूल्य की जांच
कुछ जमीन सौदों में खरीद मूल्य और बाजार मूल्य के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठे हैं। इसी कारण एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि सभी खरीद प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के अनुसार हुई थीं या नहीं।
71 एकड़ भूमि खरीद की पड़ताल
ट्रस्ट की बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच लगभग 71 एकड़ जमीन खरीदी गई थी। इन सभी सौदों से जुड़े दस्तावेज अब जांच एजेंसियों के दायरे में हैं।
कुछ कर्मचारियों और सहयोगियों से दोबारा पूछताछ
जांच के दौरान मंदिर प्रबंधन और दान राशि की गणना प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों से दोबारा पूछताछ की गई है। एसआईटी यह समझने की कोशिश कर रही है कि दान राशि की गिनती, रिकॉर्डिंग और सुरक्षा की जिम्मेदारी किन लोगों के पास थी।
वीवीआईपी पास व्यवस्था भी जांच के घेरे में
सूत्रों के मुताबिक, मंदिर में वीवीआईपी पास जारी करने की व्यवस्था और उससे जुड़े अधिकारों की भी जांच की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि पास जारी करने की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार संचालित हो रही थी या नहीं।
जांच पूरी होने का इंतजार
फिलहाल जांच एजेंसियां दस्तावेजों और बयानों के आधार पर तथ्यों को जुटा रही हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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