1999 कारगिल युद्ध के वीर रामसमुझ यादव ने जन्मदिन क

जन्मदिन के दिन ही देश के लिए शहीद हुए थे रामसमुझ यादव, कारगिल की जंग में 22 साल की उम्र में दिया सर्वोच्च बलिदान

Remembering Kargil Hero Ram Samujh

आज़मगढ़ {उत्तर प्रदेश}: 1999 के कारगिल युद्ध की वीर गाथाएं आज भी देशवासियों के दिलों में देशभक्ति का जज्बा भर देती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के सगड़ी तहसील स्थित नाथूपुर गांव की है, जहां के वीर जवान रामसमुझ यादव ने अपने जन्मदिन के दिन ही मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहादत प्राप्त की थी।

जन्मदिन बना शहादत का दिन

30 अगस्त 1999 का दिन नाथूपुर गांव के लिए कभी न भूल पाने वाला दिन बन गया। इसी दिन रामसमुझ यादव ने कारगिल की बर्फीली पहाड़ियों पर अपना 22वां जन्मदिन मनाया और दुश्मनों से लड़ते हुए देश के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। रामसमुझ यादव का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। माता-पिता और तीन भाई-बहनों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। बचपन से ही उनके मन में सेना में शामिल होकर देश सेवा करने का सपना था। उनके भाई प्रमोद यादव के अनुसार, वर्ष 1996 में रामसमुझ भारतीय सेना की 13 कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती हुए। अपनी बहादुरी और लगन के चलते कुछ ही समय में उन्हें दुनिया के सबसे कठिन सैन्य मोर्चों में से एक सियाचिन ग्लेशियर पर तैनाती मिली।

कारगिल युद्ध में संभाला मोर्चा

सियाचिन से लौटने के बाद रामसमुझ की तैनाती चंडीगढ़ में हुई, लेकिन इसी दौरान कारगिल युद्ध शुरू हो गया। उन्हें दोबारा दुश्मनों से मुकाबले के लिए युद्ध क्षेत्र में भेजा गया। रामसमुझ यादव की टुकड़ी को कारगिल के बेहद दुर्गम पॉइंट 5685 को पाकिस्तानी घुसपैठियों से मुक्त कराने का जिम्मा सौंपा गया था। 30 अगस्त को कड़ाके की ठंड और कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने अपने साथियों के साथ दुश्मनों का सामना किया। भीषण लड़ाई में उन्होंने अदम्य साहस दिखाया और चोटी पर तिरंगा फहराया। इसी संघर्ष के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हुए।

गांव में आज भी जिंदा है शहीद की याद

रामसमुझ यादव की शहादत ने पूरे परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया था। उनकी मां और बहन लंबे समय तक इस सदमे से उबर नहीं पाईं। सरकार की सहायता योजनाओं के तहत परिवार को गैस एजेंसी और कृषि भूमि उपलब्ध कराई गई, जिससे आज परिवार अपना जीवन यापन कर रहा है। नाथूपुर गांव में हर साल 30 अगस्त को शहीद मेला आयोजित किया जाता है, जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर कारगिल के वीर सपूत रामसमुझ यादव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

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