घरेलू हिंसा की शिकायत और 210 करोड़ का आरोप: कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य का पलटवार, निष्पक्ष जांच की चुनौती
देहरादून (उत्तराखंड)। उत्तराखंड सरकार में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य द्वारा अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा और उत्पीड़न की पुलिस शिकायत दर्ज कराने के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। अस्पताल के बिस्तर से जारी बयान में कैबिनेट मंत्री ने प्रताड़ना के आरोपों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि "अन्याय और अत्याचार के खिलाफ अब चुप नहीं रहना है, बल्कि बोलना है।"
प्रताड़ना और कानूनी कार्रवाई: अस्पताल से मंत्री का संदेश
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति गिरधारी लाल साहू पर लंबे समय से मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला दर्ज होने के बाद अस्पताल में भर्ती मंत्री ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि पद या प्रतिष्ठा चाहे जो हो, किसी भी महिला को घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।
रेखा आर्य ने कहा, "मैंने यह निर्णय इसलिए लिया ताकि चाहे साधारण महिला हो या विशेष पद पर बैठी महिला, यदि उसके साथ घरेलू हिंसा होती है तो उसे सही निर्णय लेना चाहिए। समाज क्या कहेगा, यह सोचकर अत्याचार सहते रहना सही नहीं है।"
210 करोड़ रुपये की संपत्ति का आरोप और काउंटर-दावा
दूसरी ओर, विवाद उस समय और उलझ गया जब मंत्री के पति गिरधारी लाल साहू ने सोशल मीडिया के माध्यम से पलटवार करते हुए रेखा आर्य पर 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा दिए। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी से पुष्टि नहीं हुई है।
इन आरोपों का जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री ने दावा किया कि उनके पति पुलिस शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने के लिए ऐसे अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, "मुझसे कहा जा रहा है कि अगर मैं अपनी तहरीर वापस ले लूं तो सारे आरोप खत्म कर दिए जाएंगे।" मंत्री ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए किसी भी निष्पक्ष जांच का सामना करने की बात कही है।
सत्ता के सामने संवैधानिक व नैतिक चुनौतियां
तीन बार विधायक और दो बार कैबिनेट मंत्री रह चुकीं रेखा आर्य का यह मामला राज्य प्रशासनिक व पुलिस तंत्र के सामने कई तीखे सवाल खड़े करता है। जिस विभाग की जिम्मेदारी प्रदेश की आम महिलाओं को सुरक्षा और अधिकार दिलाना है, उसकी ही शीर्ष मंत्री को न्याय के लिए थाने और पुलिस प्रशासन का रुख करना पड़ा है।
मामला सामने आने के बाद राज्य महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया है और मंत्री से मुलाकात कर मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन घरेलू हिंसा की शिकायत और संपत्ति से जुड़े आरोपों पर कितनी तेजी और निष्पक्षता से जांच आगे बढ़ाता है।