राजस्थान में गरमाया काला झंडा विवाद, जमानत पर छूटे RLP नेता ने कहा- 'मेरे एनकाउंटर की हो सकती थी साजिश'
डीडवाना-कुचामन (राजस्थान): भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ को काले झंडे दिखाने के चर्चित प्रकरण में आरोपी बनाए गए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) नेता रामनिवास पोषक को एक के बाद एक दर्ज हुए छह मुकदमों में जमानत मिलने के बाद घर पहुंचने पर हजारों समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान पोषक मीडिया से रूबरू हुए और प्रदेश सरकार, पुलिस प्रशासन तथा पूरे घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।
रामनिवास ने एनकाउंटर कराए जाने की जताई आशंका
रामनिवास पोषक ने दावा किया कि उनके खिलाफ कम समय में लगातार मुकदमे दर्ज करने और कार्रवाई करने के पीछे उन्हें डराने, तोड़ने और राजनीतिक रूप से खत्म करने की मंशा थी। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि परिस्थितियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि उनका "एनकाउंटर कराने की साजिश" भी हो सकती थी। पोषक ने कहा कि भले ही भाजपा के दबाव में आई पुलिस का इरादा मुझे तोड़ने और खत्म करने का था, लेकिन मैं पहले से ज्यादा मजबूत होकर निकला हूं। मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है और जनता के हक की लड़ाई पहले से अधिक मजबूती के साथ जारी रहेगी।
जनता की आवाज उठाने पर गिरफ्तारी लोकतंत्र पर हमला
मीडिया से बातचीत में पोषक ने कहा कि प्रदेश का युवा बेरोजगारी से परेशान है, किसान अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से चिंतित है, आम आदमी महंगाई की मार झेल रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय जनता की आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई कर रही है।
मदन राठौड़ ने संवाद के बजाय गिरफ्तारी का रास्ता अपनाया- रामनिवास
उन्होंने कहा कि वे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से युवाओं के रोजगार, किसानों की समस्याओं, नीट पेपर लीक और अन्य जनहित के मुद्दों पर सवाल पूछने पहुंचे थे, लेकिन संवाद के बजाय गिरफ्तारी का रास्ता अपनाया गया। पोषक ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।
14 दिनों में छह मुकदमे दर्ज करने का आरोप
रामनिवास पोषक ने दावा किया कि मात्र 14 दिनों के भीतर उनके खिलाफ छह मुकदमे दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और न्यायालयों से राहत मिलने के बाद वे पुनः जनता के बीच लौटे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएलपी कार्यकर्ताओं ने लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया था, लेकिन उन्हें अपराधियों की तरह पेश किया गया। वहीं सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के मामलों में कार्रवाई नहीं होने का भी आरोप लगाया।
फिर आएंगे मदन राठौड़ तो होगा विरोध, पूछेंगे सवाल
पोषक ने स्पष्ट कहा कि उनका संघर्ष रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ दोबारा जिले में आते हैं तो आरएलपी कार्यकर्ता फिर विरोध प्रदर्शन करेंगे और युवाओं, किसानों, भ्रष्टाचार तथा जनहित के मुद्दों पर सवाल पूछेंगे।
भाजपा के स्थानीय नेता पर लगाए संपर्क करने के आरोप
मीडिया से बातचीत के दौरान रामनिवास पोषक ने किसी का नाम लिए बिना दावा किया कि भाजपा के एक स्थानीय नेता ने उनसे कई बार संपर्क किया था। पोषक के अनुसार उस नेता ने विरोध प्रदर्शन जारी रखने के लिए कहा था क्योंकि इससे उसे संगठन में जिलाध्यक्ष का पद मिलने की संभावना दिखाई दे रही थी।
मंत्री पुत्र के मामले का भी उठाया मुद्दा
पोषक ने आरोप लगाया कि एक मंत्री के पुत्र द्वारा एक सेवानिवृत्त सैनिक के साथ कथित अभद्रता और धमकी देने के मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जबकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लोकतांत्रिक तरीके से प्रदेश और देश से जुड़ी समस्याओं के बारे में सवाल पूछने पर आरएलपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगातार मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे दोहरा मापदंड बताया।
पिता प्रभुराम पोषक ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट तक भेजी शिकायत
दूसरी ओर रामनिवास पोषक के पिता प्रभुराम पोषक ने पूरे मामले को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकपाल ऑफ इंडिया, मुख्यमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश, राज्य मानवाधिकार आयोग, पुलिस महानिदेशक राजस्थान, डीडवाना-कुचामन जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला कलेक्टर सहित विभिन्न संवैधानिक एवं प्रशासनिक संस्थाओं को शिकायत पत्र भेजा है। शिकायत में एफआईआर संख्या 155/2026 के संबंध में रामनिवास पोषक की गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए जमानत के संवैधानिक अधिकार में बाधा उत्पन्न करने, राजनीतिक दबाव में पुलिस शक्ति के दुरुपयोग, मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन तथा न्यायालयी अभिलेखों में एफआईआर को अनुपलब्ध रखने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
लोकतांत्रिक विरोध को अपराध की तरह पेश किया गया
प्रभुराम पोषक ने शिकायत में कहा कि उनके पुत्र को प्रदेश की पुलिस मशीनरी का निशाना इसलिए बनाया गया क्योंकि उन्होंने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के कुचामन दौरे के दौरान लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया तथा सरकार की नीतियों पर असहमति व्यक्त की। शिकायत में कहा गया है कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने इस अधिकार को अपराध की तरह प्रस्तुत करने का प्रयास किया।
राजनीतिक दबाव में काम कर रही है पुलिस
प्रभुराम पोषक ने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम से यह आशंका उत्पन्न होती है कि स्थानीय पुलिस राजनीतिक दबाव में कार्य कर रही है तथा जांच एजेंसियां निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया और राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए आपराधिक कानूनों का उपयोग किया गया।
संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के उल्लंघन का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि रामनिवास पोषक की गिरफ्तारी और उसके बाद कम समय में लगातार मुकदमे दर्ज करने की कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के विपरीत प्रतीत होती है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि किसी भी नागरिक को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता।
निष्पक्ष जांच और हस्तक्षेप की मांग
प्रभुराम पोषक ने शिकायत के अंत में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ,न्यायपालिका, मानवाधिकार आयोग तथा संबंधित अधिकारियों से पूरे प्रकरण में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने तथा न्याय की गरिमा बनाए रखने की मांग की है। इस बीच काला झंडा प्रकरण में लगातार सामने आ रहे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप, प्रशासनिक फेरबदल और न्यायालयी कार्यवाही ने पूरे मामले को प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना दिया है।