अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ पहुंचे भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष, 13 साल बाद राज्य में हुई वापसी
तवांग (अरुणाचल प्रदेश)। भगवान शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेष 13 साल के लंबे अंतराल के बाद अरुणाचल प्रदेश लौट आए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने तवांग स्थित 'गादेन नामग्याल ल्हात्से मठ' में इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया। इस प्रदर्शनी के जरिए राज्य के श्रद्धालुओं को भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन, नमन और आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। यह प्रदर्शनी 31 अक्टूबर से 21 नवंबर तक राज्य के तीन जिलों में आयोजित की जाएगी।
तीन जिलों में आयोजित होगी पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी
मुख्यमंत्री के अनुसार, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को राज्य के अलग-अलग जिलों में प्रदर्शित किया जाएगा। इसका कार्यक्रम 31 अक्टूबर से 7 नवंबर तक तवांग जिले में रहेगा। इसके बाद 8 से 14 नवंबर तक पश्चिम कामेंग और 14 से 21 नवंबर तक नामसाई जिले में श्रद्धालु इनके दर्शन कर सकेंगे। इस आयोजन का उद्देश्य राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को भगवान बुद्ध की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने प्रधानमंत्री मोदी का जताया आभार
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस प्रदर्शनी को मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, संस्कृति मंत्रालय और राष्ट्रीय संग्रहालय को भी आयोजन में सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया। खांडू ने कहा कि यह पहल और हाल ही में राज्य में आयोजित इंटरनेशनल टूरिज्म मार्ट, अरुणाचल प्रदेश की सांस्कृतिक और पर्यटन क्षमता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के समर्थन को दर्शाते हैं।
तनाव और अनिश्चितता के दौर में बुद्ध की शिक्षाएं महत्वपूर्ण
समारोह में मुख्यमंत्री ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज दुनिया तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, ऐसे में बुद्ध की शिक्षाएं पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने लोगों से जीवन और समाज की चुनौतियों का सामना करने के लिए बुद्ध के ज्ञान, करुणा और सह-अस्तित्व के संदेश को अपनाने की अपील की। साथ ही, उन्होंने बौद्ध अनुयायियों से इन शिक्षाओं को दैनिक जीवन में उतारने और विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव बढ़ाने का आग्रह किया।
दलाई लामा और प्रधानमंत्री मोदी ने भेजा शुभकामना संदेश
मुख्यमंत्री ने 14वें दलाई लामा का भी आभार जताया, जिन्होंने प्रदर्शनी के लिए अपनी शुभकामनाएं और आशीर्वाद भेजे। उनका संदेश इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (IBC) के महासचिव पूज्य शार्टसे खेनसुर जांगचुप चोडेन रिम्पोछे ने उपस्थित लोगों के सामने पढ़कर सुनाया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश भी साझा किया। इसमें प्रधानमंत्री ने इस प्रदर्शनी को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व का अवसर बताते हुए अरुणाचल प्रदेश के लोगों को शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने बौद्ध विरासत के संरक्षण पर दिया जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं दो हजार वर्षों से अधिक समय से मानवता को शांति और करुणा की दिशा में प्रेरित कर रही हैं। ये शिक्षाएं दुनिया के विभिन्न देशों के साथ भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को भी मजबूत करती हैं। उन्होंने बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर जैसे महत्वपूर्ण बौद्ध स्थलों के विकास, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शिखर सम्मेलनों और पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनियों का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने एक सदी से अधिक समय बाद पिपरहवा के अवशेषों की भारत वापसी और पाली भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने को भी बौद्ध धर्म की बौद्धिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
तवांग मठ को बताया बौद्ध आस्था और शिक्षा का प्रमुख केंद्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अरुणाचल प्रदेश को भारत की बौद्ध विरासत का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने बौद्ध आस्था और शिक्षा के केंद्र के रूप में तवांग मठ के निरंतर महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि तवांग, बोमडिला और नामसाई में आयोजित होने वाली यह प्रदर्शनी राज्य के श्रद्धालुओं को बौद्ध विरासत और भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से गहराई से जुड़ने का अवसर देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदर्शनी और बौद्ध धर्म पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से देश की साझा बौद्ध विरासत के प्रति लोगों की समझ और सम्मान बढ़ेगा।
अरुणाचल बौद्ध परिसंघ की स्थापना की मुख्यमंत्री ने की घोषणा
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने राज्य में बौद्ध परंपराओं और संस्थानों को एक मंच पर लाने के लिए 'अरुणाचल बौद्ध परिसंघ' की स्थापना की घोषणा की। उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में महायान और थेरवाद, दोनों बौद्ध परंपराएं फल-फूल रही हैं। महायान बौद्ध समुदाय तवांग, पश्चिम कामेंग, मेचुका, टुटिंग, तक्सिंग क्षेत्र और अंजाव में मौजूद हैं, जबकि थेरवाद बौद्ध समुदाय मुख्य रूप से नामसाई और चांगलांग में केंद्रित हैं।
अगाधम्म होंगे परिसंघ के पहले अध्यक्ष
खांडू ने बताया कि परिसंघ की स्थापना का निर्णय दोनों बौद्ध परंपराओं के वरिष्ठ नेताओं और प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। इस प्रक्रिया में उपमुख्यमंत्री चौना मीन और नामसाई के विधायक जिग्नू नामचूम भी शामिल रहे। नामसाई परियत्ति शासन बौद्ध विहार के मुख्य भिक्षु पूज्य अगाधम्म को परिसंघ का पहला अध्यक्ष चुना गया है। वहीं, कार्मिक एवं आध्यात्मिक मामलों के विभाग (DoKAA) के निदेशक थुप्तेन काल्डेन इसके महासचिव होंगे।
इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन से संबद्धता की तैयारी
अरुणाचल बौद्ध परिसंघ, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (IBC) से संबद्धता प्राप्त करने का प्रयास करेगा। इसके जरिए राज्य की विविध बौद्ध धार्मिक परंपराओं और प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए एक साझा मंच तैयार करने की योजना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह परिसंघ राज्य की बौद्ध परंपराओं और संस्थानों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पूर्वोत्तर के बौद्ध स्थलों के विकास की पहल का स्वागत
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने केंद्रीय बजट में पूर्वोत्तर भारत के बौद्ध स्थलों के विकास को लेकर प्रधानमंत्री की घोषणा का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय पर्यटन मंत्री के साथ चर्चा के बाद संबंधित मंत्रालय इस पहल के लिए नीतिगत ढांचे पर काम कर रहा है। खांडू ने उम्मीद जताई कि प्रस्तावित नीति से पूरे अरुणाचल प्रदेश के बौद्ध विरासत स्थलों को लाभ मिलेगा और उनके संरक्षण एवं विकास को बढ़ावा मिलेगा। (Source: ANI)
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