उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश की गई न्यायिक आयोग क

2024 संभल हिंसा रिपोर्ट: भाजपा ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की, आयोग ने घटना को बताया 'पूर्व नियोजित साजिश'

Sambhal Violence Report Seeks Strict Action

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश की गई न्यायिक आयोग की रिपोर्ट के बाद भाजपा नेताओं ने बुधवार को 2024 की संभल हिंसा के दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की। रिपोर्ट में इस घटना को "पूर्व नियोजित साजिश" बताया गया है। आयोग ने संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क और सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल समेत कई स्थानीय नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा, जामा मस्जिद प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जफर अली, सचिव मशहूद अली फारूकी और समिति के अन्य सदस्यों का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है।

भाजपा सांसद बोले- दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि सरकार को जांच के निष्कर्षों के आधार पर ठोस और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने एएनआई से कहा, "सरकार को जांच के निष्कर्षों के आधार पर सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और मुझे विश्वास है कि वह ऐसा करेगी।" उन्होंने आगे कहा, "उनकी संलिप्तता घोर राजद्रोह की ओर इशारा करती है, जिसका उद्देश्य अराजकता फैलाना, समाज को विभाजित करना और अशांति का माहौल बनाना था। यह अपराध और आतंकवाद का एक गंभीर मामला है, इसलिए ऐसे व्यक्तियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।"

दिनेश शर्मा ने बताया बड़ी साजिश

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने भी आरोप लगाया कि 2024 की संभल हिंसा एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी। उन्होंने कहा, "यह निस्संदेह एक बड़ी साजिश थी। जब पुलिस ने मामले की जांच की, तो व्यापक रूप से रिपोर्ट और बयान सामने आए तथा बड़े पैमाने पर दंगे भड़काने के इरादे से कई व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। संलिप्तता की पूरी सीमा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।"

रिपोर्ट में क्या कहा गया?

संभल में नवंबर 2024 की हिंसा पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट बुधवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि "पूर्व नियोजित साजिश" थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन गोलियों से लोगों की मौत हुई, वे पुलिस द्वारा नहीं चलाई गई थीं। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि हिंसा के दौरान दंगाइयों ने पुलिस के हथियार लूटने का प्रयास किया था।

एएसआई सर्वे के दौरान हुई थी हिंसा

न्यायिक जांच आयोग का गठन 24 नवंबर, 2024 को संभल स्थित शाही जामा मस्जिद के बाहर हुई हिंसा की जांच के लिए किया गया था। यह हिंसा एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक के न्यायालय के आदेश पर कराए गए सर्वेक्षण के दौरान हुई थी। इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों पुलिसकर्मी घायल हुए थे। यह सर्वे वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन की उस याचिका के बाद कराया गया था, जिसमें यह पता लगाने की मांग की गई थी कि क्या मस्जिद मूल रूप से किसी मंदिर के स्थान पर बनी थी।

आक्रमणकारियों के नाम पर सड़कों के नाम बदलने की मांग

उत्तर प्रदेश विधानसभा में 'विशेष उल्लेख' के दौरान भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने आक्रमणकारियों के नाम पर रखी गई सड़कों और सार्वजनिक स्थलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, "जहाँगीर या शाहजहाँ जैसे व्यक्तियों के नाम पर रखी गई सड़कें गहरी पीड़ा का भाव पैदा करती हैं। इन हमलावरों के नाम देखकर शत्रुता की भावना जागृत होती है और गुलामी के दौर की दर्दनाक यादें ताजा हो जाती हैं।" उन्होंने ऐसे नामों की समीक्षा के लिए एक आयोग गठित करने की मांग करते हुए कहा, "मैं इन आक्रमणकारियों से जुड़े प्रतीकों और स्मारकों का नाम बदलने तथा अप्रचलित कानूनों की गहन समीक्षा के लिए एक आयोग के गठन की मांग करता हूं। हमें स्मारकों का नाम आक्रमणकारियों के बजाय उन वीर नायकों के नाम पर रखना चाहिए जिन्होंने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च योगदान दिया है।"

(एएनआई)

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