भोपाल। मध्यप्रदेश में IAS अधिकारी संतोष वर्मा एक ब

IAS संतोष वर्मा का विवादित बयान फिर चर्चा में..

IAS अधिकारी संतोष वर्मा मध्यप्रदेश

भोपाल। मध्यप्रदेश में IAS अधिकारी संतोष वर्मा एक बार फिर अपने बयान की वजह से सुर्खियों में हैं। उन्होंने दावा किया है कि हाई कोर्ट SC-ST वर्ग के अभ्यर्थियों को सिविल जज बनने नहीं देता। इसलिए इस वर्गों के कई योग्य उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में पिछड़ जाते हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। वर्मा ने कहा कि सिविल जज भर्ती परीक्षा में कुल 400 अंकों का मूल्यांकन होता है, लेकिन वास्तविकता में SC-ST वर्ग को 50% अंक पाने पर भी चयन नहीं मिल पाता। उनका आरोप है कि हाई कोर्ट “जानबूझकर” कटऑफ बढ़ा देता है, जिससे इन वर्गों के उम्मीदवार सूची में स्थान नहीं बना पाते। उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि सामान्य वर्ग (Unreserved) में 43 उम्मीदवार और OBC में 18 उम्मीदवार सफल हुए, लेकिन SC-ST वर्ग से केवल 1 से 2 ही चयनित क्यों हुए। वर्मा के अनुसार, यह स्थिति बताती है कि चयन प्रक्रिया में असमानता मौजूद है।

हाई कोर्ट का पक्ष, नई सूची पहले ही जारी-

वर्मा के आरोपों पर न्यायालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि कोर्ट पहले ही नई चयन सूची जारी कर चुका है, जिसमें सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को निर्धारित नियमों के अनुसार अंक दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि चयन में पारदर्शिता बरती गई है और किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं किया गया। कोर्ट का यह भी कहना है कि कुछ अभ्यर्थियों को 20 अंकों की ग्रेस मार्क्स नीति के तहत लाभ मिला  और संशोधित सूची इन्हीं सुधारों के आधार पर तैयार की गई है।

विवादित बयान -

संतोष वर्मा ने कहा था: “जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी नहीं देगा, तब तक आरक्षण समाप्त नहीं होना चाहिए ” यह बयान सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था और इसके बाद उन्हें प्रशासनिक हलकों में आलोचना का सामना करना पड़ा था।