सतोपंथ-स्वर्गारोहिणी ट्रेक पर लौटी रौनक: 15,100 फीट की ऊंचाई पर उमड़े देश भर के आध्यात्मिक सैलानी
चमोली (उत्तरखंड)। उत्तराखंड के चमोली जनपद के बद्रीनाथ धाम से आगे अलकापुरी वैली में समुद्र तल से 4600 मीटर यानी 15,100 फीट की ऊंचाई पर स्थित आध्यात्मिक पर्यटन और तीर्थाटन के लिए प्रसिद्ध सतोपंथ-स्वर्गारोहिणी ट्रेक पर मौसम खुशगवार होने के बाद एक बार फिर चहल-पहल बढ़ने लगी है।
आध्यात्मिक तीर्थयात्री दल बद्रीनाथ धाम के दर्शनों के साथ-साथ 25 किलोमीटर के इस विकट सत्य पथ यानी सतोपंथ सरोवर-स्वर्गारोहिणी की यात्रा पर लगातार पहुंच रहे हैं। यह दुरूह मार्ग साधु-संतों, साधकों, योगियों से लेकर साहसिक पर्यटन, ट्रैकिंग और आध्यात्मिक शांति चाहने वाले पर्यटकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।
मुंबई के दल ने साझा किया ट्रैक का रोमांच
अदम्य प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस क्षेत्र से तपोवन वैली स्थित 'हिमालयन एक्सप्लोर' संस्था के कपिल नेगी अपने मुंबई (महाराष्ट्र) के 7-सदस्यीय आध्यात्मिक पथारोही दल के साथ सकुशल वापस लौटे हैं।
अपने अनुभव साझा करते हुए कपिल नेगी ने बताया कि, "सतोपंथ-स्वर्गारोहिणी के इस दुरूह ट्रैक पर जितनी कठिनाइयां हैं, उतनी ही शांति और प्राकृतिक शुद्धता आज भी बरकरार है। पवित्र तिकोने सतोपंथ सरोवर में आस्था की डुबकी लगाकर मन-आत्मा से सारे विकार दूर हो गए हैं। चक्र तीर्थ से आगे का सफर बर्फबारी के बाद कठिन जरूर था, लेकिन मन में दृढ़ विश्वास और संकल्प हो तो राह आसान बन जाती है।"
उन्होंने यह भी बताया कि बद्रीनाथ धाम से लौटते वक्त उन्हें माना, लक्ष्मी वन और चक्र तीर्थ कैंप साइट के आसपास कई अन्य ट्रेकिंग दल भी इस रूट पर आगे बढ़ते मिले।
पांडवों के स्वर्गारोहण से जुड़ा है इसका पौराणिक इतिहास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडव इसी रास्ते से स्वर्ग गए थे। सतोपंथ से 3 किलोमीटर आगे 'स्वर्गारोहिणी ग्लेशियर' स्थित है। इस धार्मिक मान्यता प्राप्त ग्लेशियर में आज भी सीढ़ियां देखी जा सकती हैं, जिन्हें 'स्वर्गारोहिणी मार्ग' के रूप में जाना जाता है।
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